नगर निगम की सफाई में सबसे बड़ी गंदगी – भ्रष्टाचार! EOW की रडार पर.
The Biggest Filth in Municipal Corporation’s Cleanliness – Corruption! Now on EOW’s Radar.
Special Correspondent, Singrauli, MP Samwad.
Despite spending crores annually on cleanliness, Singrauli Municipal Corporation faces a garbage crisis. Allegations of corruption and double payments to private contractors have surfaced. EOW has initiated an investigation into the scam, raising serious questions on officials’ role and accountability in managing waste and public funds.
MP संवाद, सिंगरौली नगर निगम हर साल कूड़ा उठाने पर 18 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है, लेकिन नतीजा शून्य है। सड़कों के किनारे, नदी-नालों में डंप किए गए कचरे से शहर दम घुटने की हालत में है। जिम्मेदारी निजी कंपनी को सौंपी गई, लेकिन हालात जस के तस हैं।
नगर निगम और कंपनी की मिलीभगत?
2018 में नगर निगम ने बिना अनुभव वाली सिटाडेल ISWM प्राइवेट लिमिटेड को 20 वर्षों के लिए कचरा संकलन और प्रबंधन का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया। हर महीने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद शहर साफ नहीं हुआ।
हैरानी की बात यह है कि वार्ड 34 और 35 की सफाई की जिम्मेदारी पहले से एनटीपीसी की है। बावजूद इसके, इन्हें भी अनुबंध में शामिल कर लिया गया। नतीजा—कंपनी को नगर निगम और एनटीपीसी दोनों से भुगतान मिल रहा है। यानी एक काम, दो ठेके, दो भुगतान।
सरकारी खजाना साफ, शहर गंदा
नगर निगम और कंपनी का यह गठजोड़ सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार का खेल इतना गहरा है कि सफाई की जगह केवल खजाना साफ होता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह सब अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं।
EOW की नजर में घोटाला
जैसे ही मामला सामने आया, EOW (Economic Offences Wing) ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है। जांच के बाद यह साफ होगा कि इस घोटाले में कौन-कौन जिम्मेदार है।
नगर निगम सहायक आयुक्त रुपाली द्विवेदी ने कहा—“मामला मेरे संज्ञान में आया है, जांच कराई जाएगी।”
यह मामला न केवल भ्रष्टाचार की परतें खोलता है बल्कि यह भी दिखाता है कि जनता का टैक्सपेयर्स मनी कैसे कागजों की सफाई में गायब हो जाता है, जबकि शहर की गंदगी जस की तस बनी रहती है।