कब थमेगा यह लिंगभेद? सतना में सड़क किनारे मिली नवजात बच्ची.
Rescued newborn baby girl from roadside in Satna, now under medical care.
A heartbreaking scene from Satna where a newborn girl was found in a bag; villagers rescued and admitted her to hospital.
When will this gender discrimination end? Newborn baby girl found abandoned on roadside in Satna.
सतना के रामपुर बाघेलान में झोले में मिली नवजात बच्ची ने इंसानियत को झकझोर दिया। जन्म के कुछ घंटे बाद ही छोड़ दी गई मासूम की जान ग्रामीणों ने बचाई। यह घटना समाज में अब भी जिंदा लिंगभेद की सोच पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
A newborn girl was found abandoned in a bag in Satna’s Rampur Baghelan. Villagers rescued the baby just hours after birth. The incident exposes deep-rooted gender bias still prevalent in society, raising serious questions about humanity and parental responsibility.
MP संवाद, सतना, रविवार को रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के बेला से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। यहां एक नवजात बच्ची को उसके जन्म देने वाले माता-पिता ने झोले में भरकर सड़क किनारे मरने के लिए छोड़ दिया।
समय पर पहुंची मदद, बच्ची की जान बची
लेकिन कहते हैं, “मारने वाले से बड़ा होता है बचाने वाला।” यह साबित हुआ जब कुछ ग्रामीणों ने रोती हुई बच्ची की आवाज सुनकर चौबे तालाब के पास उसे देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। बेला चौकी प्रभारी के निर्देश पर आरक्षक चितेन्द्र पांडेय मौके पर पहुंचे और बच्ची को सतना जिला अस्पताल के स्पेशल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर है और इलाज जारी है।
जन्म के चंद घंटे बाद ही छोड़ा गया
बच्ची को जहां छोड़ा गया वह जगह नेशनल हाईवे-30 के किनारे स्थित चौबे तालाब के पास है। जानकारों के अनुसार, नवजात की उम्र लगभग 6 से 8 घंटे बताई जा रही है। इससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि बच्ची को जन्म के तुरंत बाद ही त्याग दिया गया।
क्या लिंगभेद अब भी जिंदा है?
बच्ची को झोले में डालकर छोड़ देने का असली कारण माता-पिता ही जानते होंगे, लेकिन प्राथमिक अनुमान यही है कि यह घटना लिंगभेद की सोच का परिणाम है। यह कोई पहली घटना नहीं है — जिले में पहले भी बेटियों को फेंक देने या छोड़ने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
अब बड़ा सवाल यही है – आखिर कब थमेगा बेटियों के खिलाफ यह अमानवीय भेदभाव?