गुना में गांव की “टपरी स्कूल” से खुली शिक्षा विभाग की पोल.
The ‘Makeshift School’ in Guna Village Exposes the Education Department’s Failures.
Special Correspondent, Guna, MP Samwad.
In Guna’s tribal-dominated Sangai village, over 40 children have been studying in a makeshift hut for three years due to a collapsed school building. Despite being in a central minister’s constituency, authorities failed to build a new school, exposing the education department’s neglect.
MP संवाद, गुना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आने वाले बमोरी विधानसभा के आदिवासी बहुल सांगई गांव में शिक्षा की स्थिति बेहद शर्मनाक है। यहां बीते तीन वर्षों से बच्चे कच्चे टपरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। एक जर्जर सरकारी स्कूल भवन के बंद होने के बाद गांव की पंचायत ने अस्थायी टपरा बनवाया, जो आज भी ‘स्कूल’ का काम कर रहा है।
बारिश में टपकती छत, गीली किताबें और टूटी उम्मीदें—यही है इस स्कूल की कहानी। एक छात्र ने बताया, “तीन साल से टपरे में पढ़ रहे हैं। बारिश में भीगते हैं, किताबें खराब हो जाती हैं।” स्कूल में 40 से अधिक छात्र हैं लेकिन स्थायी भवन नहीं। शिक्षक भी एक ही है।
? सरकारी उपेक्षा का आलम:
सांगई गांव में न तो कोई और सरकारी भवन है, न ही प्रधानमंत्री आवास योजना का समुचित लाभ मिला है। सिर्फ तीन मकान बने हैं, जबकि ज़रूरत कहीं अधिक है।
?️ बजट के नाम पर भेदभाव?
DPC ऋषि शर्मा का कहना है कि स्कूल भवन निर्माण के लिए बजट बच्चों की संख्या के आधार पर आता है। इसलिए कम छात्रों वाले स्कूलों को प्राथमिकता नहीं मिलती। इस बयान ने शिक्षा की नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
? सिंधिया के हस्तक्षेप से उम्मीदें
जब मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंचा तो उन्होंने गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से बात कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। ग्रामीणों को अब पक्की छत और बेहतर भविष्य की उम्मीद है।