सक्षम’ से सक्षम बनते शिक्षक: डिंडौरी में हुआ रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम.
Teachers Becoming Empowered through ‘Saksham’: Refresher Training Program Held in Dindori.
A one-day refresher training program was organized in Dindori to enhance the life skills of students through the Saksham initiative. Master Trainers from multiple blocks were trained on curriculum delivery, gender sensitivity, and child protection. The program focused on practical application and inclusive learning environments.
MP संवाद, डिंडौरी। डिंडौरी जिले में एक दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य सक्षम कार्यक्रम के तहत मास्टर ट्रेनर्स को जीवन कौशल विकास (Life Skills Development) की गहन जानकारी देना था। यह प्रशिक्षण जिला प्रशिक्षण संस्थान, डिंडौरी में आयोजित हुआ, जिसमें अमरपुर, बजाग, करंजिया, डिंडौरी, समनापुर, मेहदवानी और शहपुरा विकासखंडों के मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया।
प्रशिक्षकों में जिला प्रबंधक श्री महाराणा प्रताप सिंह परमार, विकासखंड प्रबंधक नीरज तिवारी, उमेश कुमार, प्रवीण उपाध्याय और भागीरथ द्विवेदी शामिल रहे।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:
- जीवन कौशल विकास पर केंद्रित सत्र: कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए सत्र संचालन की रणनीति पर चर्चा हुई, विशेषकर संदीपनी व एकलव्य आवासीय विद्यालयों में।
- वर्ष 1 और वर्ष 2 के मॉड्यूल: कक्षा 6 के लिए वर्ष 1 और कक्षा 7–8 के लिए वर्ष 2 पाठ्यक्रम के संचालन की विधि स्पष्ट की गई।
- मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका: ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करना और जीवन कौशल सत्रों का विद्यालयों में समय पर आयोजन सुनिश्चित करना।
प्रशिक्षण के प्रमुख निष्कर्ष:
- मास्टर ट्रेनर्स को दोनों वर्षों के पाठ्यक्रमों की समझ दी गई।
- सभी ट्रेनर्स अपने-अपने ब्लॉक के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।
- विद्यालय स्तर पर जीवन कौशल कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
डिस्कशन प्वाइंट्स:
- वर्ष 1 और 2 के मॉड्यूल में अंतर पर गहराई से चर्चा।
- सत्र क्रमांक 6 का डेमो प्रस्तुत किया गया।
- सत्र संरचना और इसके प्रमुख तत्वों पर बातचीत।
- सक्षम मॉडल स्कूल की अवधारणा और BMS (Behavioral Monitoring System) के कार्यान्वयन पर फोकस।
बाल संरक्षण और जेंडर समानता पर विशेष चर्चा:
- स्कूलों में जेंडर इनक्लूसिव वातावरण बनाने की रणनीति।
- जेंडर नॉर्म्स और संवेदनशीलता को शिक्षा में समाहित करने के उपाय।
- जेंडर सेंसिटिव टीचिंग प्रैक्टिसेज और गतिविधियों पर फोकस।