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सुरक्षित इंटरनेट दिवस: बेटियों और महिलाओं के लिए डिजिटल सुरक्षा का संकल्प”

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महिलाओं और बेटियों के लिए डिजिटल सुरक्षा अनिवार्य है। दमोह में आयोजित कार्यशाला में साइबर सुरक्षा पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

दमोह में आयोजित साइबर सुरक्षा कार्यशाला में उपस्थित अतिथि

दमोह में सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर महिलाओं और बेटियों को साइबर क्राइम से बचने की जानकारी दी गई।

Safer Internet Day: A Commitment to Digital Security for Daughters and Women.

Soney Singh, Damoh, MP Samwad.

दमोह में सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं, बेटियों और युवाओं को डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध से बचाव के तरीके सिखाए गए। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हटा विधायक उमादेवी खटीक और जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटैल ने की।

कार्यक्रम का आयोजन शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (पी.जी. कॉलेज), दमोह के सभागार में हुआ, जहां अपर कलेक्टर मीना मसराम ने अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया—क्योंकि इंटरनेट से सुरक्षा का संदेश देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देना जरूरी है!

विधायक उमादेवी खटीक ने क्या कहा?

विधायक खटीक ने कहा कि इंटरनेट का उपयोग आज के समय में अनिवार्य हो गया है, लेकिन इसके साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी है। उन्होंने बेटियों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा, “महिलाएं तो पहले से ही सतर्क रहती हैं, लेकिन आने वाली पीढ़ी को भी डिजिटल सुरक्षा का ज्ञान होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “मोबाइल फोन हमें सूचना और सुविधा दोनों देता है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि इसका सही उपयोग कैसे करें। इस कार्यशाला में दी गई जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है और इसे ब्लॉक स्तर तक ले जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता फैलाई जा सके।”

जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटैल का संदेश

पटैल ने कहा कि साइबर सुरक्षा से संबंधित यह अभियान लगातार चलना चाहिए। उन्होंने बेटियों से अपील की कि अपने मोबाइल नंबर, आधार कार्ड और व्यक्तिगत जानकारी को अनावश्यक वेबसाइटों पर साझा न करें

उन्होंने कहा, “मोबाइल हमारे लिए ज्ञान का द्वार खोलता है, लेकिन कई बार लोग इसका गलत उपयोग करने लगते हैं। हमें सतर्क रहना चाहिए कि हम किन वेबसाइटों पर जा रहे हैं और किन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।”

साइबर सेल के अधिकारियों का क्या कहना था?

साइबर सेल प्रभारी टीआई रचना मिश्रा ने बताया कि महिलाओं और युवतियों को साइबर क्राइम से बचाने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई थी। उन्होंने इंटरनेट से जुड़े प्रमुख खतरों को रेखांकित किया, जैसे—
✔️ सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करना
✔️ अजनबियों से ऑनलाइन बातचीत में सावधानी बरतना
✔️ प्राइवेट अकाउंट सेटिंग्स और मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना
✔️ ब्लैकमेलिंग और साइबर शोषण से बचने के तरीके सीखना

उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 का उपयोग करने की सलाह दी और कहा कि महिलाएं अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल को लॉक करें ताकि निजी जानकारी गलत हाथों में न जाए।

साइबर टीम के सौरभ टंडन ने क्या जानकारी दी?

टंडन ने बताया कि 11 फरवरी को सेफ इंटरनेट दिवस पर टीम द्वारा लोगों को पासवर्ड सुरक्षा, QR कोड स्कैम और फेक वेबसाइटों को पहचानने के तरीके सिखाए गए। उन्होंने कहा, “फेक वेबसाइट और असली वेबसाइट में अंतर समझें और सतर्क रहें, क्योंकि इंटरनेट पर सुरक्षा आपकी अपनी जिम्मेदारी है!”

अन्य वक्ताओं की बातें

कार्यक्रम में दीक्षा राय और दुर्गेश मिश्रा ने भी इंटरनेट सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी योगेंद्र सिंह ठाकुर और डी.आर.एम. महक खोसला ने विषय पर व्याख्यान दिया।

कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य नूतन पटैरिया ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन ई-गवर्नेंस मैनेजर महेश अग्रवाल ने किया।

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