न CHO, न दवाएं! रीठी के हेल्थ सेंटरों की खुली पोल.
No CHO, No Medicines! Reethi’s Health Centers Fully Exposed.
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
Health centers in Katni’s Reethi block are in shambles—no CHOs, no diagnostic kits, and no accountability. Government-promised 17 basic tests remain on paper while villagers rely on quacks. Ground reality exposes the failure of public health delivery and corruption in rural healthcare infrastructure.
कटनी (रीठी)। जिले के रीठी जनपद के अंतर्गत आने वाले उप-स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की स्थिति बेहद चिंताजनक है। करोड़ों की लागत से बनाए गए ये केंद्र ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए स्थापित किए गए थे, लेकिन हकीकत में इनमें न तो आवश्यक जांच उपकरण उपलब्ध हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित रहते हैं।
17 अनिवार्य जांचों में से अधिकतर नहीं होतीं
इन सेंटर्स में होने वाली 17 अनिवार्य स्वास्थ्य जांचों में से अधिकतर या तो होती ही नहीं या सिर्फ कागजों में दर्ज की जाती हैं। इनमें ब्लड शुगर, थायराइड, डेंगू, हेपेटाइटिस बी-सी, HIV, स्पूटम, मलेरिया और यूरिन टेस्ट जैसी जरूरी जांचें शामिल हैं।
सीएचओ मौजूद नहीं, झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला
ग्राम पंचायत देवरीकला, निट्ठर्रा, इमलाज, उमरिया, अमगवा, मझगवां जैसे इलाकों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) अक्सर अपने पदस्थापना स्थल पर नहीं होते। ग्रामीणों को मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है, जिससे फर्जी दवाइयों का उपयोग और गंभीर बीमारियों की अनदेखी हो रही है।
जांच उपकरण गायब, कागजी खानापूर्ति चालू
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रीठी क्षेत्र के कई स्वास्थ्य केंद्रों से थायराइड, डेंगू और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की जांच किटें गायब हैं। आरोप है कि या तो इन्हें निजी प्रयोग में ले लिया गया है या फिर हेराफेरी कर दी गई है।
जब कभी निरीक्षण टीम आती है, तो पहले से ही “शो पीस” तैयार कर दिए जाते हैं ताकि सब कुछ सामान्य दिखे।
करोड़ों का बजट, लेकिन सेवा ज़ीरो
इन केंद्रों के संचालन पर सरकार हर साल लाखों-करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन कोई स्पष्ट मॉनिटरिंग नहीं होने से धन का दुरुपयोग हो रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं कागजों पर पूरी दिखाई जाती हैं लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है।
गंभीर बीमारियों का बोझ बढ़ेगा
यदि इस लापरवाही पर जल्द लगाम नहीं लगाई गई, तो ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों का बोझ कई गुना बढ़ जाएगा। यह पूरी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।