मातृत्व वंदना या मातृत्व शोषण? रीठी के स्वास्थ्य केंद्र का सच.
योजनाएं जब माओं को धोखा देती हैं: रीठी का मातृत्व लाभ घोटाला उजागर
5 महीने बाद भी इंतजार: रीठी की माओं को अभी तक नहीं मिले 16,000 रुपये
Matritva Vandana or Matritva Shoshan? The Harsh Reality of Reethi Health Center.
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
रीठी में नवप्रसूताओं को महीनों से नहीं मिली मातृत्व सहायता! अधिकारियों का बहाना – ‘पोर्टल खराब है’। कब मिलेगी इन माओं को उनकी गाढ़ी कमाई?
New mothers in Reethi denied maternity benefits for months! MP govt’s welfare scheme fails at ground level as officials blame ‘portal issues’. When will these struggling women get justice?
MP संवाद, कटनी। सरकारी अस्पतालों की हालत बेहाल है और रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इसका जीवंत उदाहरण है। यहां न सिर्फ पेड़ काटे जा रहे हैं, बल्कि दवा के नाम पर मरीजों से पैसे भी वसूले जा रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजना की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
1 अप्रैल 2018 में शुरू की गई इस योजना के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिक परिवारों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान 16,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य है कि महिलाएं समय पर उचित चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकें और प्रसव के बाद पोषण व स्वास्थ्य की देखभाल में कोई कमी न रहे। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके अलावा, जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को 1,400 रुपये और शहरी महिलाओं को 1,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराने आई ग्राम उमरिया निवासी सोमवती पटेल (पति: अजय पटेल) बताती हैं कि वह अपनी प्रसूति सहायता राशि के लिए दर-दर भटक रही हैं। उनकी पहली डिलीवरी 18 जनवरी को हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें कोई सहायता नहीं मिली है। अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्हें सिर्फ “पोर्टल” का हवाला दिया जाता है। रीठी क्षेत्र में सोमवती जैसी कई महिलाएं हैं, जो सालों से अपनी राशि के लिए भटक रही हैं।
सवाल यह है कि जब शासन ने प्रसूति सहायता राशि की प्रक्रिया को सरल बनाया है, तो लाभार्थियों तक पैसा पहुंचने में इतनी देरी क्यों हो रही है? इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि जिले में 10-12 लोगों के आवंटन में देरी हो रही है और जैसे ही आवंटन जारी होगा, सहायता राशि दी जाएगी। लेकिन, यह “जैसे-तैसे” का खेल कब तक चलेगा?
