रीठी में स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल, ताले जड़े केंद्रों पर लटकी उम्मीदें.
Health Services Exposed in Reethi: Hopes Locked Behind Shut Health Centers.
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
Neglected healthcare in Reethi exposes a grim reality—locked wellness centers, missing CHOs, and helpless villagers. Despite official orders, ‘Aarogya Mandirs’ remain closed, leaving people vulnerable to seasonal illnesses and quacks. A silent system failure endangers lives in rural Madhya Pradesh.
MP संवाद, कटनी, रीठी सीएचसी अंतर्गत लगभग 17 आरोग्य मंदिर (हेल्थ वेलनेस सेंटर्स) संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर प्रत्येक स्थान पर एक सीएचओ (Community Health Officer) यानी “स्वास्थ्य सेवाओं का देवदूत” नियुक्त किया गया है। यह जानकारी रीठी अस्पताल में आयोजित सीएचओ और एएनएम की समीक्षा बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा साझा की गई थी। साथ ही, सभी सीएचओ को स्पष्ट निर्देश भी दिए गए थे कि “हर दिन आरोग्य मंदिर खुले रहें और उन पर ताला नहीं लगना चाहिए।”
लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट है।
अधिकतर सीएचओ अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं और अपनी सुविधा अनुसार घर बैठे ही फर्जी कागज़ों पर स्वास्थ्य सेवाएं दिखा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार तो ये सीएचओ अनजान नंबर से आने वाली मरीजों की कॉल तक नहीं उठाते।
स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले की शिकायतें आम
कहने को तो सभी आरोग्य केंद्रों पर सीएचओ और एएनएम की नियुक्ति की गई है, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर ताले लटके रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सप्ताह में केवल एक दिन टीकाकरण के लिए सीएचओ आती हैं, बाकी दिन केंद्र बंद रहते हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों पर बढ़ रही निर्भरता
इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है, जिन्हें इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ती है और मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। बरसात के मौसम में जब मौसमी बीमारियाँ और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा अधिक होता है, तब इन केंद्रों का बंद रहना ग्रामीणों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।