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सरकारी अस्पताल का अमानवीय चेहरा! ठेले पर जन्मा बच्चा, जिंदगी शुरू होने से पहले खत्म.

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Denied hospital treatment twice, a pregnant woman in Ratlam was forced to deliver on a cart, leading to her baby’s tragic death.

A distressed husband pushes a cart carrying his pregnant wife towards a hospital on a dimly lit street, highlighting medical negligence.

Helpless husband pushes his pregnant wife on a cart after being denied hospital care twice—tragic consequences of medical negligence.

The Inhumane Face of a Government Hospital! Baby Born on a Cart, Life Ends Before It Begins.

Special Correspondent, Ratlam, MP Samwad.

A shocking case of medical negligence emerged from Ratlam’s Sailana, where a pregnant woman was denied treatment twice at a government hospital. With no transport available, her husband carried her on a cart, where she delivered the baby, but the newborn tragically died. Authorities have suspended negligent staff.

MP रतलाम में सरकारी अस्पताल की लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सैलाना में एक गर्भवती महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दो बार लौटा दिया गया। तीसरी बार जब उसे फिर प्रसव पीड़ा हुई, तो उसका पति कोई साधन न मिलने के कारण पत्नी को हाथ ठेले पर ही अस्पताल ले जाने के लिए निकल पड़ा। दुखद रूप से, रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई, और नवजात शिशु की मौत हो गई।

यह घटना सैलाना के कालिका माता रोड निवासी कृष्णा ग्वाला की पत्नी नीतू के साथ हुई। प्रसव पीड़ा होने पर परिवार दो बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, लेकिन दोनों बार उन्हें वापस भेज दिया गया। जब रात में फिर से तेज दर्द उठा, तो पति को कोई साधन नहीं मिला और मजबूरी में हाथ ठेले पर ही पत्नी को अस्पताल ले जाना पड़ा। दुर्भाग्यवश, रास्ते में ही महिला ने ठेले पर ही बच्चे को जन्म दिया, लेकिन नवजात जीवित नहीं बच सका।

घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। सैलाना एसडीएम मनीष जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई:

मामले के सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. एस. सागर ने लापरवाही बरतने वाली दोनों नर्स चेतना चारेल और गायत्री पाटीदार को निलंबित कर दिया है। वहीं, ड्यूटी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।

बड़े सवाल:

  • अगर कोई गर्भवती महिला सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के लिए जाती है, तो उसे लौटाया क्यों गया?
  • किस परिस्थितियों में उसे वापस भेजा गया?
  • आखिर इंसान की जान बचाने की शपथ लेने वाले डॉक्टरों की संवेदनाएं इस तरह क्यों खत्म हो रही हैं?

यह घटना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का गंभीर मामला है, जो प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करता है।

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