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रेलवे में पानी घोटाला, नकली पानी, जिम्मेदार चुप या लिप्त.

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Railway water scam uncovered: fake packaged water supplied, risking lives while authorities turn a blind eye. Urgent action needed.

Fake packaged water scam in Indian Railways, exposing health risks for passengers while officials remain silent or involved.

Indian Railways caught in fake water scam—passengers at risk, authorities under scanner.

Water scam in Railways — fake water supplied, authorities silent or involved.

Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.

भारतीय रेलवे में पानी घोटाले का खुलासा! नकली पैकेज्ड पानी यात्रियों को परोसा जा रहा है। जिम्मेदार चुप हैं या शामिल? हर घूंट में खतरा छिपा है और जवाबदेही गायब। यह गंभीर मामला देशभर में जांच की मांग करता है। सच सामने आना जरूरी है!

MP संवाद भोपाल, प्रदेश के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को फर्जी तरीके से नॉन-ब्रांडेड पानी बेचा जा रहा है। आधिकारिक तौर पर रेल नीर की बोतलें बिकनी चाहिए, लेकिन इसकी जगह अवैध विक्रेता नकली पानी की बोतलें बेच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि रेलवे प्रशासन और रेलवे पुलिस इस घोटाले को रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है, जिससे आरोप लग रहे हैं कि यह सब उनकी मिलीभगत से चल रहा है।

20 रुपये में बिक रही हैं नकली बोतलें

जांच में पता चला है कि रेलवे स्टेशनों पर बिसलेरी जैसे प्रसिद्ध ब्रांड्स की नकल करके अमानक पानी की बोतलें बेची जा रही हैं। ये बोतलें न सिर्फ नकली हैं, बल्कि इन्हें 20 रुपये प्रति बोतल की ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा है। यह सब रेलवे अधिकारियों, पुलिस और यात्रियों की नजरों के सामने हो रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

विरोध करने वालों को धमकाया जाता है

अगर कोई यात्री या जागरूक नागरिक इस बारे में आवाज उठाता है, तो विक्रेता उन्हें धमकाने और परेशान करने से नहीं हिचकते। कई मामलों में लोगों को धक्का देना, मोबाइल छीनने की कोशिश करना और गाली-गलौज जैसी घटनाएं सामने आई हैं। यात्रियों को डर के कारण चुप रहना पड़ता है, खासकर जब वे परिवार के साथ हों।

रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप

साफ है कि यह घोटाला बिना अधिकारियों की सहमति के इतने बड़े पैमाने पर नहीं चल सकता। अधिकांश स्टेशनों पर रेल नीर की जगह दूसरे ब्रांड्स का पानी बेचा जा रहा है, जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है, लेकिन रेलवे प्रशासन ने अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया है।

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