106 दिनों की संघर्ष गाथा – नीमच अस्पताल में डॉक्टरों ने रचा करिश्मा.
Doctors at Neemuch Hospital fought for 106 days to save a newborn’s life. A story of hope, dedication, and medical miracle.
A newborn’s fight for life: 106 days of dedication by doctors at Neemuch Hospital | mpsamwad.com
106 Days of Struggle – Doctors Created a Miracle at Neemuch Hospital.
Special Correspondent, Neemuch, MP Samwad.
A heartwarming tale of dedication! In Neemuch District Hospital, five doctors fought tirelessly for 106 days to save a newborn’s life. Their unwavering commitment and medical expertise turned despair into hope, proving that humanity and perseverance can work miracles even in the toughest circumstances.
MP नीमच, जिला अस्पताल के स्टाफ़ ने समय पूर्व जन्मे एक ऐसे बच्चे की जान बचाने में सफलता हासिल की है, जिसके जीवित रहने की संभावना नगण्य मानी जा रही थी। करीब साढ़े छह माह में जन्मे, महज 680 ग्राम वजनी इस शिशु को 5 डॉक्टरों की टीम ने 106 दिनों तक कड़ी निगरानी और देखभाल के बाद स्वस्थ किया है।
सांस लेने की गंभीर समस्या से जूझ रहा था मासूम
दरअसल, जिले की जावद तहसील के हनुमंतिया गांव की किरण जटिया का 17 दिसंबर 2023 को समय पूर्व प्रसव हुआ था। इस दौरान जन्मे शिशु का वजन मात्र 680 ग्राम था, और वह शॉक तथा श्वसन संबंधी गंभीर समस्याओं से पीड़ित था। शिशु को तुरंत एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट), जिला अस्पताल नीमच में भर्ती कराया गया। सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटील के मार्गदर्शन में एसएनसीयू के चिकित्सकों और स्टाफ़ ने एफबीएनसी गाइडलाइन (फैसिलिटी-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर) के अनुसार उपचार शुरू किया। डॉ. प्रशांत राठौर, डॉ. अंकित महेश्वरी, डॉ. श्वेता गर्ग, डॉ. आशीष जोशी और डॉ. योगेंद्र धाकड़ की टीम ने असंभव-सा लगने वाले इस मिशन को सफल बनाया।
ऐसे हुआ उपचार
डॉ. श्वेता गर्ग के अनुसार, एसएनसीयू में भर्ती के तीसरे दिन से शिशु को विशेष आहार देना शुरू किया गया। आठवें दिन से उसे कंगारू मदर केयर (मां की छाती से शिशु को सटाकर रखने की विधि) दी जाने लगी, जो 30 दिनों तक जारी रही। 106 दिनों तक एसएनसीयू में रहे शिशु का वजन धीरे-धीरे बढ़ा, और मां भी स्तनपान कराने में सक्षम हो गईं। 2 अप्रैल 2024 को शिशु को पूरी तरह स्वस्थ होने पर छुट्टी दी गई। मां किरण और परिवार ने एसएनसीयू टीम का आभार जताया।
विशेषज्ञों ने बताई चुनौतियां
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत राठौर ने बताया, “यह शिशु साढ़े छह माह की गर्भावस्था के बाद पैदा हुआ था। समय पूर्व प्रसव के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन टीम के समन्वित प्रयासों से हमने इसे जीवनदान दिया।” उन्होंने गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच और तुरंत चिकित्सकीय सहायता ले की सलाह दी।