पारदर्शिता की नई फसल: नरसिंहपुर में बदली धान खरीदी की तस्वीर.
नरसिंहपुर में धान खरीदी केंद्र पर सर्वेयर द्वारा गुणवत्ता जांच करते हुए
A New Crop of Transparency: Paddy Procurement Gets a Fresh Look in Narsinghpur.
Special Correspondent, Ranjeet Singh Tomar, Narsinghpur MP Samwad News.
MP संवाद, नरसिंहपुर। जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान उपार्जन का कार्य पूरी पारदर्शिता और व्यवस्थित तरीके से जारी है। शासन के कड़े निर्देशों और बीते वर्षों में सामने आई अनियमितताओं से सबक लेते हुए इस वर्ष धान खरीदी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीकी और किसान-हितैषी बनाया गया है।
मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन मुख्यालय, भोपाल द्वारा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से चयनित आर.बी. एसोसिएट्स ग्लोबल कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को नरसिंहपुर जिले में धान उपार्जन व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सर्वेयरों की नियुक्ति पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की है। चयन प्रक्रिया में शासन की उपार्जन नीति के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, कार्य अनुभव और दक्षता को आधार बनाया गया है।
चयनित एवं अधिकृत सर्वेयरों को जिला प्रबंधक, मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड, नरसिंहपुर के माध्यम से प्रत्येक धान उपार्जन केंद्र पर तैनात किया गया है। ये सर्वेयर किसान द्वारा लाई गई धान की नमी, सफाई और रंग की वैज्ञानिक विधि से जांच कर रहे हैं।
गुणवत्ता पर सख्ती, पारदर्शिता पर जोर
धान की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस वर्ष भंडारण स्तरीय केंद्रों पर दो-दो सर्वेयरों की तैनाती की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल एफ.ए.क्यू. (FAQ) मानक की धान ही गोदामों तक पहुंचे, जिससे बाद में रिजेक्शन या विवाद की स्थिति न बने।
किसानों को राहत, खरीदी प्रक्रिया तेज
अनुभवी और प्रशिक्षित सर्वेयरों द्वारा मौके पर ही गुणवत्ता परीक्षण और त्वरित निर्णय से धान खरीदी प्रक्रिया तेज हुई है। नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं, कचरा और बदरा निर्धारित मानक से कम होने पर ही धान को पास किया जा रहा है।
मौके पर सुधार की सुविधा
शासन के नए नियमों के तहत यदि किसी किसान की धान किसी कारण से रिजेक्ट होती है, तो केंद्रों पर ही पंखे और छरने उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे किसान तुरंत धान की सफाई कर पुनः विक्रय कर सकें।
धान उपार्जन की यह नई व्यवस्था न केवल पारदर्शिता की मिसाल बन रही है, बल्कि किसानों का भरोसा भी मजबूत कर रही है।