कटनी की सड़कों पर मौत का खेल: मालवाहकों में ठूंसकर ले जाए जा रहे लोग, प्रशासन मूकदर्शक!
Shocking negligence by Katni police uncovered by MP Samwad. Read the full investigation on public safety failures.
MP Samwad exposes police negligence in Katni - Lack of action endangers public safety.
Death Game on Katni Roads: People Crammed into Goods Vehicles, Administration Plays Spectator!
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
MP संवाद, कटनी। जिले में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या प्रशासनिक लापरवाही की भयावह तस्वीर पेश कर रही है। यातायात नियमों की अनदेखी, मालवाहक वाहनों में खुलेआम सवारी ढोना और स्थानीय पुलिस की कमजोर निगरानी अब लोगों की जान ले रही है। हादसों के बाद की जाने वाली चालानी कार्रवाई समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन पा रही।
मालवाहकों में जान जोखिम में डालकर की जा रही सवारी
बुधवार को ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के खमतरा में एक इको वाहन के पलटने से तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि दर्जन भर लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल था। इससे पहले, दो बसों की आपसी टक्कर में दर्जनों यात्री घायल हुए थे। पिछले दिनों बारातियों से भरी मालवाहक गाड़ी के पलटने से कई लोगों की मौत हो चुकी है।
प्रशासन की निष्क्रियता बनी हादसों की वजह
जिले के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर अक्सर देखा जाता है कि मजदूरों से भरे दर्जनों लोडर वाहन खुलेआम दौड़ते हैं, जिनमें वाहन की क्षमता से कहीं अधिक सवारियाँ बैठी होती हैं। ढीमरखेड़ा, बड़वारा और बहोरीबंद क्षेत्र में अप्रैल माह से लगातार ऐसे हादसे बढ़े हैं।
मजदूर बन रहे हैं प्रमुख शिकार
शहर के बाहरी इलाकों से काम के लिए आने वाले दैनिक मजदूर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। ग्रामीण अंचलों की सड़कों पर आवागमन करने वाले मजदूरों को मालवाहकों में ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है। चालक प्रति सप्ताह मजदूरों से दूरी के अनुसार मोटी रकम वसूलते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं करते।
अप्रैल-मई में हुए प्रमुख हादसे:
- ट्रक की चपेट में आने से बाइक सवार की मौत
- दो बाइक की टक्कर से दो युवकों की मौत
- बस-ट्रक भिडंत में ट्रक चालक की मौत
- बस पलटने से कई यात्री घायल
- तेज रफ्तार वाहन से युवक की मौत
- बारातियों से भरी मालवाहक के पलटने से कई मौतें
- टायर फटने से कार पलटी, चालक की मौत
- इको वाहन पलटने से तीन महिलाओं की मौत
प्रशासनिक निष्क्रियता की कीमत जनता चुका रही है
सवाल यह नहीं है कि कब कार्रवाई होगी, बल्कि यह है कि कार्रवाई कब तक चलेगी और कितनी गंभीरता से होगी। केवल चालान काटना, औपचारिक जांच करना और प्रेस विज्ञप्ति जारी करने से जानें नहीं बचाई जा सकतीं।
