MP में नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा! हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जांच तेज.
MP Nursing College fraud case: High Court cracks down, investigation accelerates, Cyber Branch submits reports. Missing evidence raises alarms. Read the full story.
MP Nursing College Fraud: High Court’s strict action, missing documents raise concerns.
Nursing College Fraud in MP! Investigation Speeds Up After High Court’s Strict Action.
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
भोपाल: नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े में हाई कोर्ट के आदेश पर साइबर ब्रांच ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश कर दी है। सोमवार, 10 फरवरी को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी और न्यायमूर्ति अचल कुमार पालीवाल की खंडपीठ के समक्ष यह रिपोर्ट दाखिल की गई, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर ले लिया।
क्या बोले जांचकर्ता?
साइबर ब्रांच ने बताया कि पूर्व महिला रजिस्ट्रार के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है। हालांकि, कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज अभी तक रिकवर नहीं किया जा सका है। फुटेज रिकवरी के लिए डीवीआर को सेंट्रल लैब भेजा गया है, जहां जांच जारी है।
ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका में क्या है?
ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि घोटाले में शामिल एक इंस्पेक्टर को नर्सिंग काउंसिल का रजिस्ट्रार और तत्कालीन निदेशक को अध्यक्ष बना दिया गया। इससे साक्ष्य से छेड़छाड़ की संभावना बढ़ गई। इस पर हाई कोर्ट ने तत्कालीन रजिस्ट्रार अनीता चंद्र और अध्यक्ष जितेश चंद्र शुक्ला को पद से हटाने के आदेश दिए थे।
सरकारी आश्वासन और कोर्ट की सख्ती
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि आदेश के बावजूद दोनों अधिकारियों को नहीं हटाया गया था। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई, जिसके बाद सरकार ने 24 घंटे के भीतर आदेश का पालन करने का आश्वासन दिया।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि नर्सिंग काउंसिल के कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेजों से भरे चार बक्से गायब हैं और 13 से 19 दिसंबर के बीच के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं हैं।
सीबीआई जांच की चेतावनी
कोर्ट ने सीसीटीवी डेटा सुरक्षित न रखने को गंभीरता से लेते हुए पुलिस आयुक्त भोपाल और साइबर सेल को फुटेज रिकवर करने के निर्देश दिए।
? महत्वपूर्ण निर्देश:
- पूर्व रजिस्ट्रार के फोन की लोकेशन ट्रैक कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वह उस अवधि में कार्यालय में मौजूद थीं या नहीं।
- क्षेत्र में लगे अन्य कैमरों, विशेष रूप से बैंक के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाए।
क्या यह मामला सीबीआई जांच तक जाएगा? बने रहिए अपडेट्स के लिए!