तहसीलदार की ‘मनमर्जी’ पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक— ‘अब 30 दिन से ज्यादा नहीं मिलेगी मोहलत!
High Court Cracks Down on Tehsildar’s ‘Arbitrariness’— ‘No More Than 30 Days’ Extension Now!
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
MP High Court mandates Tehsildars to act within 30 days on encroachment removal. Bhopal Tehsildar’s 11-month delay triggers property probe by Lokayukta. Strict departmental inquiries ordered for negligence under SARFAESI Act.
MP संवाद, भोपाल: गोविंदपुरा के तहसीलदार दिलीप कुमार चौरसिया की लापरवाही ने पूरे मध्य प्रदेश के तहसीलदारों के लिए हाईकोर्ट का गुस्सा भड़का दिया है। ADM के आदेशों को 8 महीने तक नजरअंदाज करने के मामले में कोर्ट ने न केवल चौरसिया की संपत्ति की लोकायुक्त जांच का आदेश दिया, बल्कि भोपाल कलेक्टर को 3 महीने में विभागीय जांच रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
पारस नगर फेज-1 में मोहम्मद अनीस और पत्नी नसीम ने बैंक से लोन लेकर मकान गिरवी रखा, लेकिन कर्ज चुकाने से इनकार कर दिया। बैंक ने ADM के आदेश से 23 जुलाई 2024 को तहसीलदार को संपत्ति का कब्जा दिलाने को कहा, मगर चौरसिया ने 11 महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने 14 मई 2025 की सुनवाई में सख्त लहजे में कहा— “तुम्हें उदाहरण बनाएंगे! यह देरी साबित करती है कि तहसीलदार अतिक्रमणकारियों से मिले हुए हैं।”
तहसीलदार की माफी भी नहीं चली!
26 जून को चौरसिया ने कोर्ट में माफी मांगी, लेकिन न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और दिनेश कुमार पालीवाल की पीठ ने इसे खारिज करते हुए पूछा— “30 दिन का काम 11 महीने में क्यों नहीं हुआ?” अब सभी तहसीलदारों को SARFAESI एक्ट की धारा-14 के तहत ADM/CJM के आदेश मिलने के 30 दिन के भीतर कार्रवाई करनी होगी, वरना विभागीय जांच और कार्रवाई तय है।