छात्रों को राहत! MP हाई कोर्ट ने स्कूलों की मनमानी पर कसा शिकंजा.
MP हाई कोर्ट का अहम फैसला – फीस विवाद पर अभिभावकों को राहत, निजी स्कूल अब छात्रों को परीक्षा से नहीं रोक सकेंगे।
हाई कोर्ट का आदेश – अब स्कूल छात्रों को फीस न भरने पर परीक्षा से नहीं रोक सकेंगे।
Relief for Students! MP High Court Cracks Down on Schools’ Arbitrary Practices.
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम आदेश जारी किया, जिससे अभिभावकों को राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने निर्देश दिया कि अभिभावक कुल फीस का केवल 50 प्रतिशत भुगतान 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ करें, जिसके बाद उनके बच्चों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। शेष फीस जमा करने के लिए अगले महीने तक की मोहलत दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।
अभिभावकों की अपील पर हाई कोर्ट का संज्ञान
मध्य प्रदेश अभिभावक संघ के प्रतिनिधि सचिन गुप्ता ने जबलपुर के विभिन्न निजी स्कूलों द्वारा की गई अपील पर हस्तक्षेप याचिका दायर की थी। गुरुवार को हुई सुनवाई में अभिभावकों का पक्ष अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने रखा।
उन्होंने तर्क दिया कि फीस न भरने के कारण कई निजी स्कूल छात्रों को परीक्षा से वंचित कर रहे हैं, जो अन्यायपूर्ण है। उन्होंने यह भी बताया कि कलेक्टर ने 32 निजी स्कूलों को 265 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली लौटाने का आदेश दिया था, बावजूद इसके, स्कूल अब भी अधिक फीस वसूलने की कोशिश कर रहे हैं।
फीस वृद्धि पर कोर्ट का सख्त रुख
हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर कुछ अभिभावकों से प्रत्यक्ष सवाल-जवाब भी किए। गौरतलब है कि 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट ने जिला कमेटी के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें निजी स्कूलों को फीस रिफंड करने और वर्तमान सत्र की फीस निर्धारित करने के निर्देश दिए गए थे।
क्राइस्ट चर्च, सेंट अलॉयसियस, ज्ञान गंगा, स्टेमफील्ड समेत कई स्कूलों ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। स्कूलों की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने तर्क दिया कि जिला कमेटी ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए फीस वापसी का आदेश दिया था और फीस वृद्धि को गलत तरीके से आंका था।
क्या कहता है फीस वृद्धि का नियम?
मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस एवं संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम के अनुसार:
- स्कूल अधिकतम 10% फीस वृद्धि कर सकते हैं।
- यदि फीस वृद्धि 10% से अधिक हो, तो जिला कमेटी की अनुमति आवश्यक है।
- 15% से अधिक वृद्धि के लिए राज्य कमेटी की स्वीकृति जरूरी है।
अभिभावकों को मिली राहत
अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा, “यह फैसला अभिभावकों के हित में है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी छात्र परीक्षा से वंचित न हो।”