मानसून सत्र से पहले सियासी तूफान! प्रदर्शन पर रोक से भड़का विपक्ष.
Political Storm Before Monsoon Session! Protest Ban Angers the Opposition.
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
Before the monsoon session, the Madhya Pradesh Assembly Secretariat banned sloganeering and protests by MLAs. Congress called it an attack on democracy. Leader of Opposition Umang Singhar accused the government of silencing public voices. The party has begun preparing to protest strongly during the upcoming session.
MP संवाद, भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में अब विधायकों द्वारा नारेबाजी और प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। विधानसभा सचिवालय द्वारा सभी विधायकों को पत्र जारी कर इस संबंध में सूचित किया गया है। पत्र के अनुसार यह निर्णय विधानसभा अध्यक्ष के स्थायी आदेश 94(2) के तहत लिया गया है।
मानसून सत्र से पहले जारी हुआ निर्देश
राज्य में 28 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। उससे पहले ही सचिवालय के इस पत्र ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पत्र में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि मंत्रियों और विधायकों के सुरक्षाकर्मियों को सत्र के दौरान प्रवेश नहीं मिलेगा।
प्रवेश व्यवस्था और दर्शक दीर्घा पर पाबंदी
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, दर्शक दीर्घा में सीमित संख्या में लोगों को एक घंटे के लिए ही प्रवेश मिलेगा। हर विधायक को केवल दो व्यक्तियों के लिए प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे।
विपक्ष का तीखा विरोध, कांग्रेस ने बुलाई बैठक
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस आदेश का तीखा विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा—
“सरकार के दबाव में विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों की आवाज़ दबाने का काम किया है। विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही को लाइव करने की मांग कर रहा है, लेकिन अब तो प्रदर्शन और जनता की आवाज़ उठाने तक पर रोक लगा दी गई है। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
सिंघार ने यह भी कहा कि संविधान की धारा 194 के तहत विधायकों को जो विशेष अधिकार दिए गए हैं, यह आदेश उन पर सीधा हमला है।
इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने अपने सभी विधायकों, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और वरिष्ठ नेताओं के साथ बड़ी बैठक बुलाई है, जिसमें मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने और इस आदेश के खिलाफ रणनीति तय की जाएगी।
