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कार्यकर्ता संतुष्टि या सत्ता संतुलन? एल्डरमैन नियुक्ति से पहले संगठन में मंथन.

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Worker Satisfaction or Power Balancing? Churning Within the Organization Ahead of Alderman Appointments.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल। मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों में एल्डरमैन (Alderman) के पदों पर राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, सत्ता और संगठन ने संभावित नामों पर लगभग सहमति बना ली है और इसी महीने से नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होने की संभावना है।

यह पूरी प्रक्रिया सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़ी मानी जा रही है। निकाय चुनाव से ठीक पहले एल्डरमैन नियुक्तियों को कार्यकर्ताओं को साधने और संगठनात्मक असंतोष को नियंत्रित करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि सबसे पहले प्रदेश के प्रमुख नगर निगम और नगर पालिकाओं में नियुक्तियां की जाएंगी। पार्टी नेतृत्व ने पहले ही जिलों में प्रभारियों के माध्यम से संभावित नामों की सूची तैयार करवा ली है।

चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को साधने की कवायद

प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में अब करीब एक वर्ष का समय शेष है। ऐसे में अचानक एल्डरमैन नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होना, इसे केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन साधने की कवायद बना देता है।

पार्टी के भीतर ही कई पदाधिकारियों का मानना है कि यदि नियुक्तियां करनी थीं तो यह प्रक्रिया दो वर्ष पहले होनी चाहिए थी। अब चुनाव नजदीक आने पर केवल प्रतीकात्मक और संतोषजनक नियुक्तियां की जा रही हैं, जिससे जमीनी नाराजगी को थामने का प्रयास किया जा रहा है।

संगठन और सरकार के बीच समन्वय का फार्मूला

भाजपा नेतृत्व ने जिला प्रभारियों को संभावित नामों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। जिला दौरों के बाद सभी प्रभारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रदेश संगठन को सौंप दी है।

बताया जा रहा है कि इन नियुक्तियों के जरिए ऐसे स्थानीय नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को साधने की रणनीति बनाई गई है, जिन्हें न तो प्रदेश कार्यकारिणी में जगह मिल सकी और न ही जिला कार्यकारिणी में।

‘पद नहीं मिला तो एल्डरमैन बना दो’ – अंदरूनी नाराजगी का इलाज

संगठन से जुड़े सूत्र स्पष्ट तौर पर स्वीकार करते हैं कि एल्डरमैन नियुक्तियों का एक बड़ा उद्देश्य संगठनात्मक नियुक्तियों से वंचित नेताओं की नाराजगी को शांत करना है। पार्टी इसे आने वाले चुनावों के लिए संगठनात्मक मजबूती के रूप में देख रही है।

12 पदों के लिए 50 से ज्यादा दावेदार

प्रदेश संगठन ने स्थानीय इकाइयों से नाम मांगे हैं। कई विधायकों ने तीन से चार नाम आगे बढ़ाए हैं। सांसदों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी अपने समर्थकों के नाम सूची में शामिल कराए हैं।

बताया जा रहा है कि सिर्फ 12 एल्डरमैन पदों के लिए 50 से अधिक नामों की दावेदारी सामने आई है, जिससे सूची तैयार करना पार्टी के लिए चुनौती बन गया है।

बड़े नगर निगमों पर खास नजर

सूत्रों के अनुसार, इस बार नाम तय करने में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद को प्राथमिकता दी गई है। जिन जिलों में संगठनात्मक विवाद या गुटबाजी रही है, वहां विशेष संतुलन साधने के निर्देश दिए गए हैं।

भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े नगर निगमों में 12-12 एल्डरमैन नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। वहीं मध्यम श्रेणी के नगर निगमों में 8-8 और नगर पालिकाओं व नगर परिषदों में जनसंख्या के आधार पर 6 और 4 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे।

दस लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों में अधिकतम 12 एल्डरमैन नियुक्त किए जा सकते हैं।

संभाग स्तर पर मंथन, फिर प्रदेश अध्यक्ष की मंजूरी

भाजपा संगठन के अनुसार, नियुक्ति से पहले संभाग स्तर पर बैठकों का आयोजन होगा, जिनमें संभाग प्रभारी, जिला प्रभारी और जिला अध्यक्ष संभावित नामों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद अंतिम सूची प्रदेश अध्यक्ष की मंजूरी के लिए भेजी जाएगी।

अंतिम स्वीकृति के बाद ही एल्डरमैन नियुक्तियों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

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