कैग रिपोर्ट में खुलासा: मनरेगा फंड से करोड़ों की हेराफेरी, MP सरकार कटघरे में!
CAG report uncovers a major MNREGA scam in Madhya Pradesh, exposing ₹85.67 lakh paid into unauthorized accounts and raising concerns over financial mismanagement.
CAG audit exposes irregularities in MNREGA funds, with ₹85.67 lakh deposited in unauthorized accounts.
CAG Report Reveals: Embezzlement of Crores from MNREGA Fund, MP Government in the Dock!
Samarth Yadav, Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश कैग (CAG) रिपोर्ट में मनरेगा (MGNREGA) योजना में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 85.67 लाख रुपये ऐसे लोगों के बैंक खातों में भेजे गए, जो न तो जॉब कार्डधारक थे और न ही उनके परिवार के सदस्य।
कैसे उजागर हुआ घोटाला?
मनरेगा और केंद्रीय वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं में परिसंपत्तियों के निर्माण पर हुई ऑडिट रिपोर्ट में यह गड़बड़ी सामने आई। रिपोर्ट में 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 तक की अवधि शामिल है।
87.65 लाख रुपये गलत खातों में ट्रांसफर
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 7 ग्राम पंचायतों की मजदूरी भुगतान सूची और 476 जॉब कार्डों के बैंक खातों की जांच में सामने आया कि जिन खातों में 87.65 लाख रुपये मजदूरी के रूप में जमा किए गए, वे संबंधित जॉब कार्डधारकों के नहीं थे।
राज्य सरकार की सफाई, लेकिन कैग ने किया खारिज
कैग के खुलासे के बाद राज्य सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि छतरपुर जिले की बमनीघाट और इमलाहा ग्राम पंचायतों के जॉब कार्डधारकों द्वारा बैंक खाता उपलब्ध न होने की स्थिति में, उनके द्वारा दिए गए अन्य खातों में भुगतान किया गया। सरकार के अनुसार, इसके लिए शपथ पत्र भी लिया गया था। हालांकि, कैग ने इस तर्क को अस्वीकार्य करार दिया।
मनरेगा भुगतान ही नहीं, करोड़ों की अन्य गड़बड़ियां भी उजागर
कैग रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ मजदूरी भुगतान में ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की अन्य वित्तीय अनियमितताएं भी पाई गईं।
- 64 ग्राम पंचायतों ने तय सीमा से 5.07 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए, जिससे 2.72 लाख मानव दिवसों का सृजन नहीं हो सका।
- 2013-19 के बीच स्वीकृत सामुदायिक परिसंपत्तियों के 15 कार्यों की अनुमानित लागत का पुनरीक्षण नहीं करने से 1.38 करोड़ रुपये व्यर्थ खर्च हुए।
- 230 निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति ठेकेदार के 10% लाभ सहित पूरी लागत पर दी गई, जिससे 1.96 करोड़ रुपये की अधिक लागत आंकी गई।
- 58 खेत तालाबों के निर्माण में DPR में काली मिट्टी भरने का प्रावधान नहीं होने से 1.23 करोड़ रुपये का खर्च बेकार गया।
- बगैर योजना बनाए 7 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक केंद्र बना दिए गए।
राज्य में मनरेगा घोटाले पर उठ रहे सवाल
कैग की इस रिपोर्ट से राज्य में मनरेगा के तहत हो रही अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गुणवत्ता निगरानी प्रकोष्ठ का गठन नहीं किया गया था, जिससे कार्यों की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं हो सकी।
अब सवाल यह उठता है कि—
✔ क्या इस घोटाले के दोषियों पर होगी कार्रवाई?
✔ क्या गलत खातों में गई मजदूरी राशि वापस लाई जाएगी?
✔ राज्य सरकार इस रिपोर्ट पर क्या ठोस कदम उठाएगी?