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मझगवां में बिजली नहीं, सिस्टम फेल: अधिकारी दे रहे सिर्फ आश्वासन.

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अंधेरे में संघर्ष करते मझगवां गांव के लोग — बिजली की बहाली के इंतज़ार में दिन-रात बिताते ग्रामीण।

A tribal family struggling without electricity, using candlelight and mobile torch for basic activities.

मझगवां गांव में बिजली संकट के बीच मोमबत्ती और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में गुजरती ज़िंदगी।

No Electricity in Mjhagwan, System Failed: Officials Only Giving Assurances.

Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

कटनी जिले के मझगवां गांव की अनुसूचित और आदिवासी बस्तियों में 15 दिनों से ट्रांसफार्मर जलकर बिजली ठप है। पानी से लेकर रोशनी तक हर ज़रूरत पर अंधेरा छाया है, लेकिन विद्युत विभाग आश्वासन से आगे नहीं बढ़ रहा।

For over 15 days, Mjhagwan village in Katni suffers total blackout after a burnt transformer. Tribal and scheduled caste families are facing severe hardship due to lack of electricity and water, while officials offer only empty promises.

MP संवाद, कटनी – विकासखंड ग्राम पंचायत विस्तरा के अंतर्गत ग्राम मझगवां में आदिवासी और अनुसूचित जाति बस्तियों को बीते एक सप्ताह से बिजली नहीं मिल रही है। इन बस्तियों में बिजली आपूर्ति हेतु लगा ट्रांसफार्मर पूरी तरह जलकर बंद हो गया है, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ है। साथ ही, पीने के पानी की व्यवस्था भी बाधित हो गई है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह ट्रांसफार्मर पिछले कई महीनों से खराब हालत में था, जिसके चलते लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई थी। लगभग 150 घरों में लोग किसी तरह से काम चला रहे थे, लेकिन 15 दिन पहले ट्रांसफार्मर जल गया और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारियों को इस बारे में कई बार सूचना दी गई, लेकिन सिर्फ आश्वासन देकर टालमटोल की जा रही है। भीषण गर्मी के बीच बिजली नहीं होने के कारण न केवल रातें अंधेरे में कट रही हैं, बल्कि कूलर, पंखे, मोबाइल चार्जिंग जैसी बुनियादी जरूरतें भी बाधित हो गई हैं।

गांव में कुछ लोगों के पास निजी बोरवेल हैं, जिनसे पानी की आपूर्ति की जाती थी, परंतु बिजली न होने के कारण वे भी बंद पड़े हैं। मजबूरी में ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। कैरोसीन उपलब्ध नहीं होने के कारण, लोग खाद्य तेल से दीया जलाकर अंधेरे में दिन बिता रहे हैं।

ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द ट्रांसफार्मर बदला जाए और बिजली व्यवस्था बहाल की जाए, वरना वे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे।

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