65 करोड़ की सड़क या जनता के पैसे की लूट? जवाब दे PWD.
₹65 Crore Road or Loot of Public Money? PWD Must Answer.

Special Correspondent, Mandla, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, मंडला | जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाली सड़क अगर खुद ही भ्रष्टाचार की शिकार हो जाए, तो सवाल सिर्फ निर्माण पर नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर खड़े होते हैं।
मंडला जिले की मवई-कुड़ेला सड़क निर्माण परियोजना ने यही कड़वी हकीकत उजागर कर दी है। करीब 65 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 35 किलोमीटर लंबी सड़क अब विकास का रास्ता कम और घोटाले का प्रतीक ज्यादा बन गई है।
लंबे समय से चल रही अनियमितताओं के खुलासे के बाद आखिरकार लोक निर्माण विभाग (PWD) ने कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या सिर्फ निलंबन से भ्रष्टाचार की भरपाई हो पाएगी?
भ्रष्टाचार का फूटा घड़ा, तीन अधिकारी सस्पेंड
लोक निर्माण विभाग के उप सचिव राजेश शाह ने सख्त रुख अपनाते हुए मवई-कुड़ेला मार्ग के उन्नयन कार्य में गंभीर अनियमितताओं पर कार्रवाई की।
निलंबित अधिकारी:
- प्रभारी कार्यपालन यंत्री: जी.एस. भलावी
- प्रभारी एसडीओ: संजय कुमार द्विवेदी
- उपयंत्री: विकास मरकाम
इन पर निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी, नियमों का उल्लंघन और गंभीर लापरवाही के आरोप हैं। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद इन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया।
65 करोड़ की सड़क या भ्रष्टाचार की सुरंग?
कागजों में यह परियोजना विकास की बड़ी तस्वीर दिखाती है—
- कुल लंबाई: 35 किमी
- प्रशासकीय स्वीकृति: ₹78.08 करोड़
- स्वीकृत लागत (PAC): ₹64.20 करोड़
- कार्य अवधि: जनवरी 2025 से जुलाई 2027
लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
स्थानीय लोगों के अनुसार:
- घटिया सामग्री का इस्तेमाल
- कई जगह अधूरा निर्माण
- तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी
यानी सड़क कम, भ्रष्टाचार की परतें ज्यादा नजर आईं।
ठेकेदार पर भी उठे सवाल
इस परियोजना का ठेका अरुण कंस्ट्रक्शन (JV) मैहर सीमेंट को दिया गया था।
आरोप हैं कि:
- निर्माण में घटिया मटेरियल का उपयोग हुआ
- बेस लेयर कई जगह कमजोर पाई गई
- गुणवत्ता जांच सिर्फ कागजों में सीमित रही
ऐसे में ठेकेदार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बिना मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव कैसे?
लापरवाही या सुनियोजित घोटाला?
यह मामला महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक सिस्टमेटिक भ्रष्टाचार मॉडल की ओर इशारा करता है:
👉 पहले भारी बजट की स्वीकृति
👉 फिर निर्माण में नियमों की अनदेखी
👉 और अंत में जांच के नाम पर औपचारिकता
यह पैटर्न साफ संकेत देता है कि मामला गहरे स्तर की मिलीभगत का हो सकता है।
जनता के साथ सीधा विश्वासघात
इस सड़क से क्षेत्र में विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलना था।
लेकिन अब हालात यह हैं:
- किसानों को परिवहन में दिक्कत
- ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी प्रभावित
- दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा
जिस सड़क से विकास आना था, वही अब परेशानी का कारण बन गई है।
सेटिंग’ के आरोप और बड़े सवाल
सूत्रों के मुताबिक ठेकेदार और अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ थी।
अब सबसे बड़े सवाल:
- क्या ठेकेदार पर भी सख्त कार्रवाई होगी?
- क्या नुकसान की भरपाई जिम्मेदारों से होगी?
- क्या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी?
अगर इन सवालों के जवाब नहीं मिले, तो यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी।