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ग्यारसपुर की पहाड़ियों में छिपा है एक खोया हुआ बौद्ध मंदिर?

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Buddhist relics in Gyaraspur may unveil a lost temple. Archaeologists urged to explore and protect this hidden historical treasure.

Ancient Buddhist relics discovered in Gyaraspur, hinting at a lost temple. Calls for excavation and heritage preservation.

Ancient Buddhist relics found in Gyaraspur, believed to be remnants of a lost temple. Experts call for archaeological exploration.

Is a lost Buddhist temple hidden in the hills of Gyaraspur?

Sitaram Kushwaha, Special Correspondent, Vidisha, MP Samwad.

A Buddhist pilgrimage from Sanchi to Bodh Gaya reaches Gyaraspur, unveiling ancient relics. Bhikkhu Dr. Anand Rakikhat Bhante explores a possible buried Buddhist temple in the hills. He urges archaeological excavation to preserve India’s lost heritage. The journey aims to free Bodh Gaya from encroachments and restore historical sanctity.

ग्यारसपुर में किया रात्रि विश्राम

पदयात्रा के दौरान यात्रियों ने ग्यारसपुर की ऐतिहासिक विरासतों का भ्रमण किया। उन्होंने बिजासन देवी मैया की पहाड़ी पर स्थित भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन किए और वंदना की। डॉ. आनंद रकिखत भंते ने बताया कि इस पहाड़ी पर कभी एक भव्य बुद्ध विहार रहा होगा, जिसके प्रमाण आज भी यहाँ मौजूद हैं।

उन्होंने आशंका व्यक्त की कि विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा इस मंदिर को नष्ट कर दिया गया होगा, जिसके अवशेष आज भी पहाड़ी पर बिखरे हुए हैं। बुद्ध की साक्षात प्रतिमा यह संकेत देती है कि यहाँ पर एक विशाल मंदिर रहा होगा।

बुद्ध स्तूप और प्राचीन धरोहरों का संरक्षण आवश्यक

भंते जी ने बताया कि ढेकीनाथ पहाड़ी पर एक बुद्ध स्तूप भी स्थित है। उन्होंने वहाँ भगवान बुद्ध की एक विशाल कटी हुई सिर की प्रतिमा देखी और साथ ही एक प्राचीन कलश भी मौजूद पाया। उन्होंने अनुमान लगाया कि इस पहाड़ी के नीचे एक विशाल बुद्ध मंदिर दफन हो सकता है, जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने सरकार और पुरातत्व विभाग से अनुरोध किया कि इस स्थल का उत्खनन कर यहाँ की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित किया जाए, जिससे हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया देख सके।

ग्यारसपुर: एक ऐतिहासिक नगरी

ग्यारसपुर ऐतिहासिक रूप से विभिन्न धर्मों का केंद्र रहा है। यहाँ हिंदू, शैव, वैष्णव, जैन और बौद्ध धर्म के अनेक मंदिर और पुरासंपदा बिखरी हुई हैं।

पदयात्रा का उद्देश्य

इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य बोधगया में स्थित सम्यक संबुद्ध की ज्ञान स्थली को अतिक्रमण से मुक्त कराना है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में महाबोधि महाविहार का निर्माण कराया था, जो आज भी दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र है। लेकिन वर्तमान में स्थानीय लोगों द्वारा इस पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इसे मुक्त कराने के लिए यह पदयात्रा आयोजित की गई है।

पदयात्रा 11 मई 2025 को बोधगया पहुँचेगी।

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