RTI और CM हेल्पलाइन की उड़ती धज्जियां: अधूरी नाली, पूरा भुगतान!
Lalbarra Panchayat under scrutiny as RTI documents reveal partial construction with full payments made. Villager’s struggle uncovers deep-rooted corruption and bureaucratic shielding.
Incomplete Drain Construction, Full Payment: RTI Ignored in Lalbarra Panchayat Scandal
RTI and CM Helpline Mocked: Incomplete Drainage, Full Payment!
Sharad Dhaneshwar, Special Correspondent, Balaghat, MP Samwad.
RTI ठुकराई, हेल्पलाइन फेल: लालबरा पंचायत में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश! अधूरी नाली, पूरा भुगतान, ग्रामीण की शिकायतें अनसुनी, सिस्टम चुप.
RTI Ignored, Helpline Failed: A villager’s struggle reveals deep-rooted corruption in Lalbarra’s Panchayat. Incomplete construction, full payment, and unanswered appeals expose a system protecting the corrupt.
लालबर्रा। ग्राम पंचायत बम्हनी और जनपद पंचायत लालबर्रा में सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) की खुलेआम अवहेलना हो रही है। एक साधारण ग्रामीण लक्ष्मण तुमसरे द्वारा मांगी गई जानकारी महीनों बीतने के बावजूद आज तक पूरी तरह नहीं दी गई। न ही दोषी पंचायत सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। यह मामला पंचायत प्रणाली में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।
नाली निर्माण में घोटाले की बू, अधूरा काम – पूरा भुगतान!
लक्ष्मण तुमसरे ने 3 दिसंबर 2024 को आरटीआई अधिनियम की धारा 6(1) के तहत पंचायत सचिव बसंत चौरे से वर्ष 2022–23 में हुए नाली निर्माण की प्रमाणित जानकारी मांगी थी। यह कार्य पूर्व सरपंच श्रीमती वासुका अंगुरे के कार्यकाल में हुआ था। लक्ष्मण का आरोप है कि कार्य अधूरा है, बावजूद इसके पूरा भुगतान निकाल लिया गया।
पंचायत सचिव की मनमानी और लापरवाही
ना तो समयसीमा में सूचना दी गई, और ना ही पहली अपील के बाद कोई संतोषजनक कार्यवाही हुई। खंड पंचायत अधिकारी द्वारा कई बार पेशी पर बुलाया गया, लेकिन पंचायत सचिव बसंत चौरे एक भी बार उपस्थित नहीं हुए। शिकायतकर्ता को अधूरी जानकारी दी गई और कहा गया – “अब कुछ नहीं मिलेगा!”
CM हेल्पलाइन भी बनी मजाक
लक्ष्मण ने सीएम हेल्पलाइन (शिकायत क्रमांक 27361287) पर भी शिकायत दर्ज की, लेकिन बिना निराकरण के उसे बंद कर दिया गया। यह सरकार की जनसुनवाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनपद पंचायत पर भी गंभीर आरोप
पूरे प्रकरण ने यह सिद्ध कर दिया है कि पंचायत सचिव और जनपद पंचायत अधिकारी एक साथ मिलकर आरटीआई कानून का मज़ाक उड़ा रहे हैं। यह केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की मिलीभगत और भ्रष्टाचार को उजागर करता है।