मजदूर की बेटी का हुआ बीएसएफ में चयन, देश की सीमाओं की रक्षा करेंगी पाथरशाही की मासूम टेम्भरे।
Tembre, a young girl from Patharshahi and the daughter of a laborer, has achieved a remarkable milestone by being selected for the Border Security Force (BSF). Her dedication and hard work will now contribute to safeguarding the nation’s borders, bringing pride to her family and community.
Patharshahi's pride: A laborer's daughter, Tembre, achieves BSF selection to safeguard the nation's borders.
A laborer’s daughter has been selected for the BSF; Patharshahi’s young Tembre will protect the nation’s borders.
Special Correspondent, Balaghat, MP Samwad.
निकटवर्ती ग्राम पाथरशाही की 22 वर्षीया मासूम टेम्भरे का हाल ही में कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल में चयन हुआ है। मासूम के चयन से उनके नाते-रिश्तेदारों सहित पूरे गांव एवं औलियाकन्हार फिजिकल क्लब में हर्ष का माहौल व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि मासूम के पिता गुलाबचंद टेम्भरे एक मजदूर है जिन्होंने पच्चीस वर्षो तक लालबर्रा की एक किराना दुकान में बतौर मजदूर कार्य किया, वर्तमान में भी उनकी गांव में छोटी-सी परचून की दुकान है जिससे उनके परिवार का गुजर-बसर होता है। मासूम को महानिरीक्षक कार्यालय से ड्यूटी ज्वाइन करने का बुलावा भी आ गया है जिसमें उन्हें पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में इन्स्पेक्टर जनरल के कार्यालय में अपने कर्तव्य हेतु उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया गया है। मासूम को अपने कर्तव्य के दौरान देश की सीमाओं की सुरक्षा हेतु नियुक्त किया जाएगा। अपने सिलेक्शन पर मासूम का क्या सोचना है, उनके सिलेक्शन से ग्रामीण बालिकाओं में किस प्रकार का उत्साह जागेगा, उनका परिवार क्या सोचता है, इस बारे में चर्चा करने के लिए एम पी संवाद की टीम उनके गांव, उनके घर पाथरशाही पहुंची।
प्राइवेट स्कूल का मुंह नहीं देखा–मासुम
चर्चा में मासूम ने बताया कि उनकी लिखित परीक्षा इसी वर्ष मार्च में हुई थी, इसके पश्चात् नवम्बर में फिजिकल, मेडिकल एवं डाक्युमेंट वेरिफिकेशन हुआ, और पिछले सप्ताह फाइल मेरिट लिस्ट आई। मेरी लिखित परीक्षा एवं फिजिकल बढि़या हुए थे, प्रारंभिक परीक्षा में 135 अंक थे, और लालबर्रा में केवल दो ही लोगों के इतने अंक थे, इसलिए मुझे चयन होने की पूरी उम्मीद थी, इसलिए मैं फाइनल रिजल्ट की प्रतीक्षा कर रही थी। ‘पढ़ाई कैसे और कहां से किए’ पूछने पर मासूम ने बताया कि उसने अमोली स्थित धानेश्वर सर की श्रेष्ठ अकादमी ज्वाइन की थी, मैं यहां सुबह जाती थी और सायंकाल 4-5 बजे वापस आती थी। स्कूल एवं कॉलेज की पढ़ाई के बारे में पूछने पर मासूम ने बताया कि उन्होंने आजपर्यन्त अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल एवं कॉलेज से ही की। पांचवीं तक गांव का स्कूल,दसवीं तक नगपुरा का स्कूल एवं इसके पश्चात लालबर्रा के उत्कृष्ट विद्यालय से हायरसेकेंडरी उत्तीर्ण की। मेरा बारहवीं गणित से था परन्तु मैंने कॉलेज में बीए लिया, तत्पश्चात् एमए किया।
परिवार की प्रथम सदस्य जिसे सरकारी नौकरी मिली
मासूम ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल में उनका सिलेक्शन होने से उनका बचपन का सपना पूरा हुआ, बचपन में जब भी कोई उनसे पूछता कि तुम बड़ी होकर क्या बनोगी तो मेरे मुंह से ‘पुलिस बनूंगी’ ही निकलता था। मुझे किसी भी ‘फोर्स’ में ही जाना था, इसलिए यहां सिलेक्शन हुआ तो मेरा लक्ष्य ही पूरा हो गया। मेरे सिलेक्शन से परिवार में सभी खुश है, मैं भी खुश हूं। मैं अपने परिवार की पहली ऐसी सदस्य हूं जिसे सरकारी नौकरी मिली है। सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले को संदेश देते हुए मासूम ने कहा कि यदि उन्हें सरकारी नौकरी पाना है तो लगातार पढ़ते रहना चाहिए, ऐसा नहीं कि दो-चार महीने पढ़ लिए, फिर छोड़ दिए, फिर पढ़ लिए, फिर छोड़ दिए कि अभी वैकेन्सी नहीं आ रही है। मैंने भी तीन-चार वर्ष तक पढ़ाई की, मुझे असफलताएं भी मिली लेकिन फाइनल सिलेक्शन भी आखिरकार हुआ ही।
बच्चों की पढ़ाई हेतु आर्थिक बंदोबस्त जरुरी–गुलाब टेम्भरे
मासूम के पिता गुलाब टेम्भरे ने बताया कि उनकी दो बेटियां एवं एक बेटा है, मेरी आर्थिक स्थिति कमजोर है फिर भी मैंने बच्चों को बहुत कठिनाइयों से पढ़ाया हूं। मैंने लालबर्रा की एक किराना दुकान में 25 वर्षो तक मजदूरी की है, अब गांव में ही परचून की दुकान चलाता हूं। बच्चों को पढ़ाने में तो तकलीफ बहुत आई, परन्तु बेटियां योग्य थी, इसलिए उनकी पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी, बड़ी बेटी को एमएससी करवाया, छोटी बेटी मासूम को काम्पीटीशन की तैयारी में लगाया। खुशी है कि उसका सिलेक्शन हुआ, अब वह देशसेवा में जा रही है, यह सोचकर भी हम लोग खुश है। अन्य अभिभावकों को अपना संदेश देते हुए श्री टेम्भरे ने कहा कि वे भी अपने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें, भले ही आर्थिक स्थिति जैसी भी हो, पढ़ाई से ही परिवार की दिशा और दशा बदलेगी, इसलिए यदि बच्चे योग्य हो तो उनकी पढ़ाई के लिए जैसे भी हो, उचित आर्थिक बंदोबस्त करना बहुत जरुरी है।
गौरवान्वित है औलियाकन्हार फिजिकल क्लब
मासूम टेम्भरे ने इस परीक्षा हेतु फिजिकल की तैयारी स्थानीय औलियाकन्हार फिजिकल क्लब से की है। मासूम की उपलब्धि पर क्लब चेयरमैन ओमप्रकाश बिसेन एवं प्रशिक्षक शैलेन्द्र यादव ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया। श्री यादव ने कहा कि “मासूम ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में जो मुकाम हासिल किया है, वह अन्य युवाओं विशेषकर लड़कियों के लिए प्रेरणा है। यह हमारी मेहनत और मासूम की लगन का परिणाम है। क्लब हमेशा से क्षेत्रीय युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण और प्रोत्साहन देने में अग्रणी रहा है। मासूम ने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्लब और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।” मासूम ने क्लब में फिजिकल प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन, मेहनत और समर्पण का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। उनके दृढ़ संकल्प ने यह साबित किया कि अगर प्रयास सच्चे हों तो सफलता निश्चित है। मासूम की सफलता से अन्य युवाओं को भी सीख लेनी चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए।”