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जो नदी कभी 12 महीने बहती थी, आज कचरे में दम तोड़ रही है.

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The river that once flowed for all 12 months is now suffocating in garbage.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। गर्मी की शुरुआत होते ही शहर में पानी की किल्लत सामने आना कोई नई बात नहीं है। लेकिन यदि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए ठोस रणनीति नहीं बनाई जाए, तो यह समस्या हर साल और भी भयावह रूप ले सकती है। नदियों की सफाई और संरक्षण के लिए सरकार और नगर निगम की ओर से कई योजनाएं तो बनाई गईं, लेकिन जमीनी हकीकत में इन योजनाओं का असर लगभग शून्य ही नजर आता है।

कटनी शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली कटनी नदी, जो कभी साल के 12 महीने कल-कल बहती थी, आज गंदगी और कूड़े-कचरे से अटी पड़ी है। कभी इसी नदी के गाटर घाट, मसुरहा घाट सहित अन्य घाटों पर लोग नहाने और दैनिक उपयोग के लिए पानी लेने आते थे, लेकिन अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि नदी का अस्तित्व ही खतरे में दिखाई देने लगा है।

नदी संरक्षण को लेकर कई बार समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने आवाज उठाई, जिसके बाद नगर निगम द्वारा कुछ योजनाओं की घोषणा भी की गई। कुछ स्थानों पर सीमित स्तर पर काम भी किया जा रहा है और नागरिकों से गंदगी न फैलाने की अपील करते हुए बोर्ड भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद नदी में कचरा फेंकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कटनी नदी को बचाने के लिए मजबूत और दीर्घकालिक योजना की जरूरत है, ताकि नदी को फिर से जीवंत बनाया जा सके। गौरतलब है कि अब यह नदी शहर के बीचों-बीच बहती है, जिससे इसके संरक्षण और सुरक्षा की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में कटनी शहर को जल संकट के साथ-साथ पर्यावरणीय संकट का भी सामना करना पड़ सकता है।

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