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42 की जगह 21 जवान! कटनी में पुलिस व्यवस्था सिस्टम की मार झेल रही.

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Rithi police station in Katni facing severe police staff shortage with only 21 personnel managing law and order

21 Personnel Instead of 42! Katni’s Police System Struggles Under Systemic Neglect.

Special Correspondent, Mohan Nayak, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद, कटनी। सरकारी विभागों में पुलिस विभाग सबसे अधिक जिम्मेदारियों वाला विभाग माना जाता है—चाहे आगजनी हो, सड़क दुर्घटना, कानून-व्यवस्था, राजनीतिक गतिविधियाँ हों या आम नागरिकों की सुरक्षा। लेकिन कटनी जिले में यही पुलिस विभाग बल की भारी कमी से जूझ रहा है और सिस्टम इस सच्चाई से आंखें मूंदे बैठा है।

कटनी जिले में कुल 18 थाने और 7 चौकियाँ हैं, लेकिन अधिकांश थानों में स्वीकृत संख्या के मुकाबले आधा से भी कम पुलिस बल तैनात है। रीठी थाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

42 स्वीकृत, तैनात सिर्फ 21—82 गांवों की सुरक्षा कैसे?

रीठी थाना क्षेत्र में 80 से 85 गांव आते हैं, लेकिन यहां मात्र 21 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जबकि स्वीकृत बल 42 होना चाहिए। यानी आधे से भी कम बल के भरोसे पूरे थाना क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था चल रही है।

स्थिति यह है कि रात की गश्त में किस जवान को लगाया जाए, यह तय करना ही अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया है। बल की कमी के चलते कई पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं, जिससे पुलिस पर काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

आबादी बढ़ी, अपराध बढ़ा—लेकिन पुलिस वहीं की वहीं

आजादी के बाद जिस आबादी के आधार पर पुलिस बल स्वीकृत किया गया था, वह आबादी अब दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही अपराधों में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है, लेकिन शासन स्तर पर न तो नए पद स्वीकृत किए जा रहे हैं और न ही पहले से स्वीकृत पदों को भरा जा रहा है।

बल की कमी के कारण पुलिस को अपराध नियंत्रण के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है, फिर भी किसी भी घटना के बाद उंगली सबसे पहले पुलिस पर ही उठती है।

VIP ड्यूटी, कोर्ट-कचहरी और कागजी काम में उलझे जवान

रीठी और आसपास के क्षेत्रों में होने वाले धार्मिक आयोजनों, वीआईपी ड्यूटी, राजनीतिक कार्यक्रमों में पुलिस बल की तैनाती अनिवार्य होती है। कई जवान दिन-रात लिखापढ़ी और न्यायालयीन कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में क्षेत्रीय गश्त और अपराध रोकथाम के लिए पर्याप्त बल बचता ही नहीं।

किसी बड़े आयोजन पर मजबूरन बाहर के थानों से पुलिस बल बुलाना पड़ता है, और यदि उसी दौरान कहीं कोई अप्रिय घटना घट जाए, तो जवाबदेही फिर स्थानीय पुलिस पर ही डाल दी जाती है।

25% थाने बल संकट में—आंकड़े खुद बोल रहे

रीठी थाना प्रभारी मोहम्मद शाहिद ने बताया—

“थाने में पुलिस बल की कमी है। बल की पूर्ति के लिए अधिकारियों को मांग पत्र भेजा गया है। शीघ्र ही पुलिस बल की पूर्ति हो जाएगी।”

वहीं, एडिशनल एसपी डॉ. संतोष डेहरिया के अनुसार—

“जिले के लगभग 25 प्रतिशत थानों में पुलिस बल की कमी है। वर्तमान में करीब 850 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जबकि आवश्यकता 1300 की है। इस संबंध में समय-समय पर उच्च स्तर पर जानकारी भेजी जाती रही है।”

सवाल बड़ा है—कब जागेगा सिस्टम?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आधी ताकत के सहारे पूरी सुरक्षा व्यवस्था कब तक चलाई जाएगी?
क्या शासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है, ताकि बाद में जांच बैठाकर जिम्मेदारी फिर पुलिस पर डाल दी जाए?

जब तक हर थाने में स्वीकृत संख्या के अनुसार पुलिस बल की तैनाती नहीं होगी, तब तक न अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है और न ही पुलिसकर्मियों का मानसिक तनाव कम हो पाएगा।

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