कटनी ने दी मलेरिया को मात! 62 से सिर्फ 1 केस पर पहुंचे, स्वास्थ्य विभाग की जीत.
Katni leads the way in malaria control with health initiatives and community participation in 2025.
Katni celebrates major success in controlling malaria cases, setting a new benchmark in public health efforts.
Katni Defeats Malaria! Cases Drop from 62 to Just 1, A Victory for the Health Department.
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad
कटनी ने मलेरिया पर बड़ी जीत दर्ज की: 62 से घटकर केवल 1 मामला, स्वास्थ्य विभाग की ऐतिहासिक सफलता!
Katni Achieves Milestone Against Malaria: Cases Drop from 62 to Just 1, Marking a Historic Health Department Victory!
MP संवाद, कटनी। जिले में मलेरिया और डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियों पर नियंत्रण पाने में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में जहां 62 मलेरिया के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में केवल 1 मामला सामने आया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इस साल अब तक मलेरिया या डेंगू से किसी की भी मौत नहीं हुई है।
कैसे मिली सफलता?
- लक्षित दवा छिड़काव: जिले के आठ ब्लॉकों के केवल उन गांवों में एल्फासाइपरमेथ्रिन दवा का छिड़काव किया गया, जहां वार्षिक परजीवी संक्रमण दर (API) अधिक थी।
- बड़े पैमाने पर जांच: अब तक 2,26,000 से अधिक नमूनों की जांच की जा चुकी है।
- जागरूकता अभियान: विश्व मलेरिया दिवस पर आशा कार्यकर्ताओं के साथ विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति:
- समय पर फॉगिंग के जरिए मच्छरों पर नियंत्रण
- एंटी लार्वा स्प्रे से प्रजनन स्थलों का विनाश
- स्वच्छता अभियानों के माध्यम से जलभराव रोकना
- ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाकर समय पर मामलों की पहचान
विशेषज्ञ की राय
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. आर.के. आठ्या ने कहा, “यह सफलता हमारी टीम की मेहनत और जनभागीदारी का नतीजा है। यह उदाहरण है कि सही रणनीति अपनाकर किसी भी बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।”
चुनौतियां भी कायम
हालांकि, कुछ सूत्रों का मानना है कि यह उपलब्धि महज “आंकड़ों का खेल” भी हो सकती है। उनका दावा है कि जमीनी हकीकत इससे थोड़ी अलग हो सकती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
आगे की योजना
- मानसून से पहले विशेष अभियान
- उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
- जनता की भागीदारी और जागरूकता बढ़ाने पर जोर