कटनी में शराब ठेकेदारों का आतंक, उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन!
Breaking: Katni Excise Department intensifies action against illegal liquor trade. Read full coverage of violations, seizures, and enforcement measures at MPSamwad.com.
Katni Excise Department conducts raid on illegal liquor operations, seizing contraband and enforcing state regulations.
Katni: Terror of Liquor Contractors, Violation of Consumer Protection Law!
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
MP संवाद, कटनी। जिले में 63 सरकारी शराब दुकानें हैं, और शराब ठेकेदार अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए गांव-गांव शराब परोस रहे हैं। इसके कारण युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है, जबकि नशा मुक्ति अभियान पर भी पलीता लग रहा है।
जानकारी के अनुसार, एक अप्रैल से नया शराब ठेका शुरू होने के बाद से जिले की आबकारी व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। नया ठेका शुरू होते ही ठेकेदार मनमानी करने लगे हैं। न केवल वे प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेच रहे हैं, बल्कि शहर से लेकर गांव-गांव तक अवैध रूप से शराब की बिक्री भी हो रही है।
शराब दुकानों में रेट लिस्ट नहीं है
जिले की शराब वितरण प्रणाली देखकर ऐसा लग रहा है कि शराब ठेकेदारों को शासन और प्रशासन का कोई भय नहीं रह गया है। वे शराब का ठेका लेकर शासन और प्रशासन को अपनी जेब में कैद कर चुके हैं। दूसरी तरफ, जिले का आबकारी अमला और पुलिस भी शराब ठेकेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
MRP से ज्यादा पर हो रही है बिक्री.
जिले में शराब के प्रिंट रेट से अधिक दाम पर बेचने की शिकायतें भी आ रही हैं। शराब ठेकेदार फुल बोतल शराब को अंकित मूल्य से 80-100 रुपये अधिक, हाफ बोतल को 40-60 रुपये अधिक और क्वार्टर बोतल को 20-30 रुपये अधिक बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
शराब ठेकेदारों द्वारा एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि का हवाला देकर अधिक कीमत वसूलने की बात कही जा रही है। प्रिंट रेट से अधिक में शराब बिकने की वजह से उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन हो रहा है।
अवैध शराब का कारोबार बढ़ा
आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। विभाग अवैध कारोबार पर कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ औपचारिकताएं निभा रहा है। कागजी कार्रवाई के अलावा ठोस कार्रवाई का कोई निशान नहीं है। इसकी निष्क्रियता ने अवैध शराब के कारोबारियों के हौसले को और बढ़ा दिया है।
पुलिस की चुप्पी संदिग्ध
अवैध शराब की बिक्री और खुली पैकारियों पर पुलिस की चुप्पी भी संदेह पैदा करती है। खुले आम शराब का अवैध कारोबार हो रहा है, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। कार्रवाई नहीं होने से पुलिस और ठेकेदारों के बीच गहरी सांठगांठ का संदेह हो रहा है।
शराब के अवैध ठेकेदारों की मनमानी और पुलिस तथा आबकारी विभाग की निष्क्रियता ने शराब माफिया को और मजबूत किया है। विभाग की इस निष्क्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह महज लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा गठजोड़ काम कर रहा है, यह जांच का विषय है। अब यह देखना होगा कि शराब दुकानों में रेट लिस्ट कब तक लगाई जाती है और ग्राहकों को बिल दिया जाता है या नहीं।
इनका कहना है
“अभी नया-नया ठेका हुआ है, दुकानों में रेट लिस्ट नहीं लगी है। एमआरपी से ज्यादा शराब अगर बेची जा रही है, इसकी जानकारी ली जाएगी।”
विभा मरकाम, आबकारी अधिकारी
“गांव-गांव अवैध शराब बिक्री को लेकर सूचना मिलने पर निरंतर कार्रवाई होती रहती है।”
डॉ. संतोष डेहरिया, एडिशनल एसपी