कटनी के स्कूलों में गिरती छतें, उठते सवाल.
Roofs Collapse in Katni Schools, Questions Rise.
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
More than 500 schools in Katni district are in a dilapidated state, risking children’s lives every day. Despite receiving ₹1 crore for repairs in two phases, misuse and inaction plague the system. The recent Rajasthan school tragedy raises urgent questions—will Katni’s crumbling education infrastructure get timely attention?
MP संवाद, कटनी। राजस्थान की दर्दनाक स्कूल भवन हादसे के बाद भी मध्यप्रदेश का शिक्षा महकमा नहीं जागा। कटनी जिले के 547 स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं, जिनमें 131 स्कूल तो गिराने योग्य घोषित किए जा चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि 97 स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह बंद है और बच्चों को पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी या सामुदायिक भवनों में ठूंसा जा रहा है।
मरम्मत के नाम पर घोटाला!
सूत्रों की मानें तो अक्टूबर 2024 में शिक्षा विभाग को 50 लाख रुपये मिले थे, लेकिन इनका उपयोग संदिग्ध है। देवगांव स्कूल में दिखाए गए 9 लाख के मरम्मत कार्य में शायद ही 9 हज़ार खर्च हुए हों। अप्रैल में फिर से 50 लाख रुपये आए, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी प्रस्ताव तक नहीं बना!
स्कूलों का ये है हाल:
| ब्लॉक | जर्जर स्कूल | गिराने योग्य | शिफ्ट किए गए |
|---|---|---|---|
| कटनी | 20 | 04 | 05 |
| रीठी | 55 | 34 | 31 |
| विजयराघवगढ़ | 124 | 29 | 07 |
| बड़वारा | 182 | 25 | 08 |
| बहोरीबंद | 127 | 19 | 31 |
| ढीमरखेड़ा | 39 | 20 | 13 |
| योग | 547 | 131 | 97 |
बच्चों की जान जोखिम में
धौरेशर प्राथमिक स्कूल में 17 बच्चे बारिश के दिनों में टपकती छतों और टूटते प्लास्टर के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। कई स्कूलों की छतें झूल रही हैं, कहीं प्लास्टर गिर रहा है और कहीं सीलन इतनी अधिक है कि कक्षाओं में बैठना भी खतरे से खाली नहीं।
अफसरों की नींद अभी भी गहरी
जिला शिक्षा अधिकारी एस.एस. मरावी का कहना है कि कक्षा 1 से 8 तक की जिम्मेदारी डीपीसी की है, लेकिन कक्षा 9 से 12 के स्कूलों की हालत पर जल्द ही प्रस्ताव भेजकर कार्य शुरू किया जाएगा।