ओपीडी में हर 10 में से 6 मरीज पेट की बीमारी से पीड़ित – प्रशासन गहरी नींद में?
WATCH: Katni’s health infrastructure overwhelmed as contaminated water causes spike in stomach diseases. With 561 cases reported this week alone, patients face long waits for treatment at understaffed hospitals.
कटनी जिला अस्पताल में पेट रोगियों की भीड़: दूषित पानी ने बढ़ाई मुसीबतें
6 out of 10 OPD patients suffer stomach ailments – Is the administration in deep slumber?
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
कटनी स्वास्थ्य आपदा: दूषित पानी से 60% मरीज पेट रोगी! ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा मामले, प्रशासन की लापरवाही बनी मुख्य वजह। डॉक्टरों ने जताई आने वाले दिनों में और बिगड़ने की आशंका।
KATNI HEALTH CRISIS: 60% of hospital patients suffer stomach ailments due to contaminated water and heatwave. Rural areas worst hit as administration fails to provide clean water. Doctors warn situation will worsen in peak summer.
MP संवाद, कटनी। भीषण गर्मी और तेज धूप ने जिले के लोगों की सेहत पर कहर बरपा दिया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में पेट दर्द, उल्टी-दस्त और डायरिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ दिनों में अस्पताल पहुंचने वाले 60% से अधिक मरीज इन्हीं बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर होने पर भर्ती करने की नौबत आ गई है।
चौंकाने वाले आंकड़े
- 561 मरीज पिछले कुछ दिनों में ओपीडी में दर्ज, जिनमें अधिकांश पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित।
- ग्रामीण इलाकों के मरीजों की संख्या अधिक, जहां दूषित पानी मुख्य समस्या।
- डायरिया के मामले बढ़े, 24 घंटे में 4-6 बार दस्त आने पर खतरनाक स्थिति।
क्या है वजह?
चिकित्सकों के मुताबिक, गर्मी और दूषित पानी इसकी प्रमुख वजह है। गांवों में लोग अशुद्ध पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे पेट में संक्रमण फैल रहा है। इसके अलावा:
- बासी भोजन और अधिक मसालेदार खानपान से समस्या और बढ़ रही है।
- शहरों के मुकाबले गांवों में साफ पानी की कमी स्थिति को और भयावह बना रही है।
चिकित्सकों की सलाह
- पानी उबालकर या फिल्टर करके पिएं।
- ओआरएस का घोल इस्तेमाल करें।
- ताजा और हल्का भोजन लें, बासी खाने से बचें।
क्या प्रशासन सोया है?
हर साल गर्मियों में यही हालात होते हैं, लेकिन साफ पानी की व्यवस्था और जागरूकता अभियानों में कोई सुधार नहीं। क्या इस बार भी मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद प्रशासन चुप्पी साधेगा?