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निरीक्षण नहीं, खानापूर्ति का खेल: कटनी खाद्य और नापतौल विभाग दोनों फेल.

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Visual representation of corruption and administrative failure in Katni’s public welfare departments – mpsamwad.com exclusive.

Negligence by Katni food and weights department affecting public health and safety – mpsamwad.com

कटनी में खाद्य एवं नापतौल विभाग की लापरवाही, जनता की सेहत और जेब पर भारी।

Not Inspection, But a Mere Formality: Both Khandwa Food and Weights & Measures Departments Fail.

Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

कटनी जिले में खाद्य और नापतौल विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने आमजन की सेहत और जेब दोनों को खतरे में डाल दिया है। सेटिंग सिस्टम और खानापूर्ति की कार्यप्रणाली ने इन विभागों को जवाबदेही से कोसों दूर कर दिया है।

Negligence and corruption in Katni’s Food and Weights Departments endanger public health and finances. A flawed ‘setting system’ shields malpractice, leaving departments unaccountable.

MP संवाद, कटनी — जिले के दो जिम्मेदार विभाग, खाद्य एवं औषधि विभाग और नापतौल विभाग, अब जनता की सुरक्षा के प्रहरी नहीं, बल्कि सौदेबाज व्यवस्था के हिस्सेदार बन चुके हैं। भ्रष्टाचार, निष्क्रियता और “सेटिंग सिस्टम” की ऐसी गहरी जड़ें जम चुकी हैं कि आमजन की सेहत और जेब दोनों लहूलुहान हो रही हैं। अफसर तमाशबीन बने बैठे हैं, जैसे किसी फिल्म का सीन देख रहे हों — फर्क सिर्फ इतना है कि यहां जनता असली शिकार है।


? खाद्य विभाग: जहां ‘मिठाई’ नहीं, ‘मिलावट’ परोसी जाती है

खाद्य विभाग का मूल कार्य है नागरिकों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना, लेकिन हकीकत में यह विभाग अब ‘सेटिंग और कलेक्शन सेंटर’ में तब्दील हो चुका है।

मिठाई, दूध, तेल—जिनसे हर घर की रसोई सजती है—में ज़हर जैसे मिलावट की शिकायतें आम हैं, पर कार्रवाई सिर्फ फाइलों में घूमती है। जनता के पेट में क्या जा रहा है, इसका विभाग को न कोई होश है, न शर्म।


⚖️ नापतौल विभाग: घटिया बाट, घटिया नीयत

बाजारों में अमानक तराजू और नकली बाटों की बाढ़ आई हुई है, लेकिन नापतौल विभाग आंखें मूंदे बैठा है। त्योहारों पर जब ग्राहक सबसे ज्यादा खरीदारी करते हैं, तभी दुकानदार उन्हें सबसे ज्यादा लूटते हैं — और अधिकारी कागजों में शिविर लगाकर खुद को ईमानदार साबित करने में व्यस्त रहते हैं।

? त्योहारों पर ‘जहर’ की छूट, विभाग मौन

जब मिठास की सबसे ज़्यादा जरूरत होती है, तब बाजारों में नकली मिठाइयां, मिलावटी दूध और तेल खुलेआम बिकते हैं। नतीजा— फूड पॉइजनिंग, पेट की बीमारियां और अस्पतालों की भीड़। लेकिन विभाग छापे सिर्फ दिखावे के लिए मारता है, और सैंपल जांच रिपोर्टें सालों में आती है।

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