फुटबॉल बना दिया इंसाफ को: रिपोर्ट लेने आया पति, विदिशा जिला अस्पताल के सिस्टम में भटका.
Justice was kicked around like a football: Husband seeking report got lost in the system of Vidisha District Hospital.
Sitaram Kushwaha, Special Correspondent, Vidisha, MP Samwad.
A grieving husband wandered office to office at Vidisha District Hospital for his late wife’s report. Instead of help, he faced apathy, bureaucracy, and a government employee busy playing mobile games — reflecting the insensitivity of the public healthcare system.
MP संवाद, विदिशा के चर्चित वर्मा हॉस्पिटल केस में मृतिका ज्योति रघुवंशी के पति अब तक न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। फरवरी माह में डॉ. शरद कुशवाहा, डॉ. विधि वर्मा और डॉ. अंकित श्रीवास्तव के खिलाफ उठे इस गंभीर मामले के बावजूद सिस्टम की संवेदनहीनता थमने का नाम नहीं ले रही।
सात दिन पहले राकेश रघुवंशी ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान पंजीकृत प्रैक्टिशनर विनियम 2023 के तहत अपनी दिवंगत पत्नी की जानकारी मांगने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन कार्यालय में एक आवेदन जमा किया था। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. आर. एल. सिंह ने इस आवेदन को तुरंत संबंधित बाबू को मार्क कर दिया था। इसके बाद आवक-जावक विभाग के बाबू ने राकेश रघुवंशी से कहा कि वे सोमवार, दिनांक 1 जुलाई 2025 को रिपोर्ट लेने आ जाएं।
लेकिन जब मंगलवार, 2 जुलाई 2025 को वे रिपोर्ट लेने पहुंचे, तो आवक-जावक विभाग का बाबू रिपोर्ट देने के बजाय उन्हें पूरे दिन फुटबॉल की तरह एक टेबल से दूसरी टेबल तक भटकाता रहा। पीड़ित पति बार-बार हाथ जोड़कर विनती करता रहा, लेकिन बाबू मोबाइल पर गेम खेलने में व्यस्त रहा।
दिनभर की दौड़धूप और अपमानजनक व्यवहार के बाद, जब एक अन्य नागरिक ने सिविल सर्जन के ऑफिस में जब अपनी नराजगी जाहिर की, तब जाकर गहमा-गहमी के बीच उन्हें उनकी पत्नी से जुड़ी रिपोर्ट दी गई।
यह सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सड़े हुए सिस्टम की तस्वीर है, जिसमें संवेदनाएं फाइलों के नीचे दबकर दम तोड़ देती हैं।