जबलपुर नगर निगम का डीजल विवाद, सार्वजनिक धन का दुरूपयोग – हाई कोर्ट.
जबलपुर नगर निगम का डीजल विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, 6 लाख रुपये के बकाया भुगतान और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर उठे सवाल।
जबलपुर में 6 लाख रुपये के डीजल भुगतान विवाद पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
Jabalpur Municipal Corporation Diesel Dispute, Misuse of Public Funds – High Court.
Special Correspondent, Jabalpur, MP Samwad.
जबलपुर: जबलपुर के आईएसबीटी बस स्टैंड के पास स्थित पेट्रोल पंप संचालक सुगम चंद्र जैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 6 लाख रुपये के डीजल भुगतान की मांग की है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में हुआ था डीजल खर्च
याचिका में कहा गया है कि 3 जनवरी 2024 को जबलपुर में मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम के लिए बसों का अधिग्रहण किया गया था। इन बसों में डीजल भरने के लिए नगर निगम के खाद्य अधिकारी ने मौखिक निर्देश दिए थे। निर्देश के अनुसार, करीब 6 लाख रुपये का डीजल याचिकाकर्ता के पेट्रोल पंप से भरवाया गया था।
बिल भुगतान की कई बार की गई मांग
अगस्त 2024 में याचिकाकर्ता ने संयुक्त कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी और निगमायुक्त से बिल भुगतान की मांग की। हालांकि, कई प्रयासों के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। कलेक्टर कार्यालय ने निगमायुक्त को राशि भुगतान का आदेश भी जारी किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट का सवाल – बिना पीओएल आदेश डीजल कैसे भरा?
सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पूछा कि क्या प्रशासन की ओर से पीओएल आदेश जारी किया गया था? याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि डीजल भरने के लिए केवल मौखिक आदेश दिए गए थे। इस पर कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए सवाल किया कि बिना किसी प्राधिकरण के बसों में डीजल कैसे भरा गया?
संयुक्त कलेक्टर व निगमायुक्त को दिए निर्देश
कोर्ट ने संयुक्त कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी और निगमायुक्त को निर्देश दिया है कि वे एसोसिएशन और उसके सदस्य को पीओएल की प्रतिपूर्ति करवाने की प्रक्रिया स्पष्ट करें।
कलेक्टर से मांगा जवाब
इसके अलावा, कोर्ट ने कलेक्टर से जवाब मांगा कि किस कानून के तहत निगमायुक्त की जिम्मेदारी बनती है कि वह मुख्यमंत्री की रैली में लगी बसों में डीजल भरवाए?
सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का मामला?
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर गोलमाल का प्रतीत होता है। जिला कलेक्टर को हलफनामे में जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
याचिका वापस लेने का विकल्प नहीं
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब याचिकाकर्ता अपनी याचिका वापस लेने का हकदार नहीं होगा। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पैरवी की।