इंदवार जल प्रदाय योजना: 7 साल में भी 52 गांवों में पानी की तंगी.
Despite a multi-crore project, the residents of Indwar’s 52 villages continue to battle water shortages, with empty taps and broken pipelines.
Seven years later, Indwar’s water supply project remains incomplete, leaving 52 villages struggling for drinking water.
Indwar Water Supply Scheme: Water Scarcity in 52 Villages Even After 7 Years.
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
Indwar water supply scheme remains incomplete after 7 years, leaving 52 villages facing acute water scarcity. Despite initial plans and investment, pipeline leakage, dry storage tanks, and unresolved technical issues have hindered water distribution. Local authorities promise remedial action, but villagers continue to suffer from insufficient water supply, remaining desperate.
MP कटनी। मप्र जल निगम की परियोजना क्रियान्वयन ईकाई इंदवार की ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना जिले के 52 गांवों में ग्रामीणों की आज तक प्यास नहीं बुझा पाई. दो वर्षों में पूरी होने वाली योजना, सात वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी हुई है। कुछ गांवों में सप्ताह में एक या दो बार पानी पहुंच रहा है, जबकि कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज सहित अन्य समस्याओं के कारण पानी नहीं आ रहा है।
जानकारी के अनुसार, इंदवार-1 ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना की स्वीकृत पुनरीक्षित अनुबंधित लागत 232.34 करोड़ रुपए है। अनुबंध के अनुसार, योजना का कार्य 17 सितंबर 2018 को प्रारंभ किया गया था तथा कार्य पूर्णता अवधि 2 अक्टूबर 2020 तक की थी। अधिकारियों का दावा है कि योजना को 31 दिसंबर 2024 तक पूर्ण कर पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 में कलेक्टर ने ठेका कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, फिर भी जल निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। कलेक्टर द्वारा लगातार जल परियोजनाओं की समीक्षा के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
योजना में शामिल 52 गांव:
योजनांतर्गत जिले के 52 ग्राम सम्मिलित हैं, जिनमें पेयजल प्रदाय के लिए 28 उच्च स्तरीय टंकियाँ का निर्माण किया गया है। बताया गया है कि कुछ उच्च स्तरीय टंकियाँ अभी तक शेष हैं। दर्जनों गांवों में पानी सप्लाई की टेस्टिंग नहीं हो पाई है। अधिकारियों का दावा है कि जिले के 52 गांवों में जल वितरण पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी पूरा कर लगभग 15,600 नल कनेक्शन प्रदाय किए जा चुके हैं।
पाइपलाइन में लगातार लीकेज:
बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसील के कई गांवों में नलजल योजना का कार्य धीमी गति से चल रहा है। गांव-गांव बिछाई गई पाइपलाइन पर लगातार लीकेज हो रही है। योजना के ठेकेदार एवं कर्मचारियों द्वारा टेस्टिंग के दौरान जीपीएस फोटो लेकर दावा किया जाता है कि नल चालू हो गए हैं, जबकि कई काम शेष हैं। तिमुआ गांव के सरपंच तीरथ पटेल ने बताया कि यहां नलों की टोटियाँ लगी हैं, लेकिन खुद गांव प्यासी है। उन्होंने कहा, “हमने सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।”
सबसे अधिक समस्या वाले गांव:
बरही और विजयराघवगढ़ तहसील के कई गांवों – करौंदी खुर्द, करौंदी कला, बुजबुजा, झिरिया, बिचपुरा, बनगवां, खन्ना, जाजागढ़, धबैया, लूली, सिजहरा, मनघटा, डोकरिया, घंघरौटा, तिमुआ, गैरतलाई, कुटेश्वर, इटौरा आदि में पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। कई स्थानों पर खोदे गए गड्ढों को आज तक नहीं भरा गया है।
दो जिलों के लिए महत्वपूर्ण योजना:
जल निगम की यह योजना दो जिलों के लिए बेहद अहम है। इंदवार परियोजना के अंतर्गत उमरिया जिले के मानपुर ब्लॉक के लगभग 65 गांवों एवं कटनी जिले के विजयराघवगढ़ तथा बरही तहसील के 52 गांवों में पानी पहुंचना था। हालांकि, कई गांवों में टंकियाँ बनी तो हैं, पर उनमें पानी नहीं पहुंचा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में ठेका कंपनी को काम सौंपा गया था, जिसमें 2018-2019 में काम चालू हुआ। निर्धारित अवधि में काम पूरा न होने के बाद कंपनी ने दो साल एक्सटेंशन के बाद भी कार्य अधूरा छोड़ दिया है।
अधिकारी का कहना:
कुछ गांवों में सड़क एवं नाली निर्माण में पाइपलाइन टूटने के कारण पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिन स्थानों पर सुधारकार्य चल रहा है। हालांकि, कटनी जिले के कई गांवों में सप्लाई टेस्टिंग अभी बाकी है। संबंधित ठेका कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भी लिखा गया है और समय-समय पर अर्थदंड की कार्रवाई की गई है।