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चौंकाने वाली रिपोर्ट: भारत प्रेस फ्रीडम में पड़ोसियों से भी पीछे.

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Shocking Report: India Lags Behind Even Its Neighbors in Press Freedom.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार | नई दिल्ली/भोपाल | 2 मई 2026

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर पहुंच गया है।

पिछले वर्ष 2025 में भारत 151वें स्थान पर था, यानी इस बार 6 पायदान की गिरावट दर्ज की गई है। भारत का कुल स्कोर घटकर 31.96 रह गया है।

25 साल में सबसे खराब वैश्विक स्थिति

30 अप्रैल 2026 को जारी इस रिपोर्ट में RSF ने खुलासा किया है कि पिछले 25 वर्षों में प्रेस स्वतंत्रता का वैश्विक औसत सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

दुनिया के 52.2% देशों में मीडिया की स्थिति “कठिन” या “बहुत गंभीर” हो चुकी है—जो लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है।

भारत के पांचों इंडिकेटर्स में कमजोर प्रदर्शन

भारत का प्रदर्शन लगभग हर मोर्चे पर चिंताजनक रहा है:

  • पॉलिटिकल इंडिकेटर: 160वां (21.16)
  • इकोनॉमिक इंडिकेटर: 144वां (32.63)
  • लीगल इंडिकेटर: 141वां (39.59) (गिरावट दर्ज)
  • सोशल इंडिकेटर: 157वां (33.65)
  • सिक्योरिटी इंडिकेटर: 158वां (32.77)

भारत लगातार “Very Serious” (बहुत गंभीर) श्रेणी में बना हुआ है।

RSF की तीखी टिप्पणी: ‘लोकतंत्र में प्रेस आज़ादी संकट में’

RSF ने अपनी रिपोर्ट में भारत को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्ट में कहा गया:

“पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, मीडिया स्वामित्व का केंद्रीकरण और खुला राजनीतिक झुकाव—इन सबके कारण प्रेस स्वतंत्रता गंभीर संकट में है।”

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 2014 से सत्ता में मौजूद केंद्र सरकार के दौरान मीडिया पर दबाव और नियंत्रण बढ़ा है।

मीडिया पर कॉर्पोरेट पकड़ और ‘गोडी मीडिया’ का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार:

  • देश में 900 से ज्यादा न्यूज चैनल और लाखों प्रकाशन हैं
  • लेकिन मीडिया स्वामित्व कुछ बड़े उद्योगपतियों तक सीमित होता जा रहा है
  • सरकार के करीबी माने जाने वाले कॉर्पोरेट समूहों का दबदबा बढ़ा है

कानून बन रहे हथियार?

RSF ने चेतावनी दी है कि भारत में कई कानूनों का इस्तेमाल पत्रकारों को दबाने के लिए किया जा रहा है:

  • देशद्रोह (Sedition) कानून
  • मानहानि (Defamation)
  • आतंकवाद-रोधी कानून
  • नया डेटा प्रोटेक्शन कानून

ये सभी सूचना की स्वतंत्रता पर असर डाल रहे हैं।

सरकारी विज्ञापन से ‘कंट्रोल’ का आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया संस्थानों की सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता बढ़ रही है, जिसका उपयोग “अप्रत्यक्ष सेंसरशिप” के रूप में किया जा सकता है।

पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा

  • हर साल 2-3 पत्रकारों की हत्या
  • आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करने वालों पर हमले
  • ऑनलाइन ट्रोलिंग, खासकर महिला पत्रकारों को निशाना
  • कश्मीर और पर्यावरण रिपोर्टिंग में ज्यादा जोखिम

पड़ोसी देशों से भी पीछे भारत

भारत की स्थिति क्षेत्रीय स्तर पर भी कमजोर दिखी:

  • नेपाल – 87
  • श्रीलंका – 134
  • बांग्लादेश – 152
  • पाकिस्तान – 153
  • भूटान – 150

भारत इन सभी देशों से पीछे है, जबकि चीन 178वें स्थान पर है।

वैश्विक तस्वीर: शीर्ष और सबसे नीचे

  • नंबर 1: नॉर्वे
  • अन्य शीर्ष देश: नीदरलैंड्स, एस्टोनिया
  • सबसे नीचे: इरिट्रिया (180), उत्तर कोरिया, चीन

लोकतंत्र के लिए चेतावनी

RSF की यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है।

सवाल साफ है:
क्या भारत में पत्रकारिता स्वतंत्र है या दबाव में काम कर रही है?

अगर हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की यह छवि और कमजोर हो सकती है।

स्रोत

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