अवैध कबाड़ कारोबार पर प्रशासन मौन, चोर बेखौफ!
नगर में खुलेआम अवैध कबाड़ कारोबार फल-फूल रहा है। प्रशासन की निष्क्रियता से चोरों और कबाड़ियों का गठजोड़ मजबूत हो रहा है, जिससे चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
प्रशासन की अनदेखी से कबाड़ कारोबार बढ़ा, चोरों को खुली छूट!
Administration Silent on Illegal Scrap Business, Thieves Fearless!
Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
बालाघाट, लालबर्रा – नगर के थाने के आसपास कबाड़ियों का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। यही वजह है कि अब चोर चोरी का सामान आसानी से कबाड़ी दुकानों में खपा रहे हैं। प्रशासन की निष्क्रियता के चलते चोर और कबाड़ियों का यह अवैध धंधा तेजी से बढ़ रहा है।
पुलिस की अनदेखी से बढ़ रहा अवैध कारोबार
थाने के पीछे और आसपास कबाड़ी दुकानों की लाइनें लगी हैं, जहां चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त हो रही है। पुलिस इन दुकानों की जांच करने और अवैध सामान की खरीद-बिक्री पर कार्रवाई करने में असमर्थ दिख रही है।
अवैध कबाड़ का व्यापार इतना बेखौफ हो गया है कि दुकानों में सड़क तक सामान फैलाया जा रहा है। संचालक बिना किसी रोक-टोक के बिजली ट्रांसफार्मर के तार और लोहे के पुर्जे खरीद रहे हैं और फिर उन्हें ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। बाइक के अलग-अलग पुर्जे और अन्य चोरी का सामान कबाड़ में खपाया जा रहा है, जिससे चोरी की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
शहर और ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ रहीं कबाड़ दुकानें
शहर के गली-मोहल्लों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कबाड़ की दुकानें तेजी से फैल रही हैं। संचालक हर सप्ताह सैकड़ों क्विंटल लोहे का कबाड़ खरीद रहे हैं, लेकिन यह लोहा और अन्य धातु आखिर कहां से आ रही है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। जैसे-जैसे कबाड़ दुकानों की संख्या बढ़ रही है, चोरी की घटनाएं भी उसी गति से बढ़ रही हैं।
जानकर भी अनजान बने हैं अधिकारी
आमतौर पर टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर गाड़ियों की खरीद-फरोख्त में दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होती है, लेकिन लालबर्रा में कबाड़ व्यापारी बिना किसी वैध कागजात के कई गाड़ियां खपा चुके हैं। कई बार एक ही कागज पर दर्जनों गाड़ियों को काटकर कबाड़ में बेचा जा चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकारी संपत्तियों को भी कबाड़ में बेचे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। हैंडपंप के पुर्जे, पीडब्ल्यूडी के सांकेतिक बोर्ड, पानी की मोटर जैसी शासकीय सामग्री भी कबाड़ के रूप में खरीदी जा रही हैं। पुलिस अधिकारियों को इस अवैध कारोबार की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।