ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद कटनी में अवैध रेत खनन नहीं थम रहा!
Katni’s illegal sand mining crisis worsens as NGT’s ban is ignored. Overloaded trucks destroy roads while authorities fail to act.
Unregulated sand mining in Katni disrupts rivers and damages roads, raising concerns over environmental and administrative negligence.
Illegal sand mining continues in Katni despite villagers’ complaints!
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
कटनी। जिले में नदियों का सीना चीरकर अवैध रेत खनन किया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। पिपही नदी के बहाव को पत्थर और मिट्टी से पूरी तरह रोक दिया गया है, जिससे अवैध रेत उत्खनन धड़ल्ले से जारी है।
? एनजीटी के नियमों की अनदेखी
स्थानीय निवासियों ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशानुसार 15 अक्टूबर तक नदियों में रेत खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी अवैध गतिविधियां जारी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा।
? प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कें खराब
ग्राम बगैहा से छिंदहाई पिपरिया तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी सड़कें ओवरलोड वाहनों के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे आवागमन में दिक्कतें बढ़ रही हैं।
? कटनी के कई इलाकों में अवैध उत्खनन
ढीमरखेड़ा क्षेत्र के पौंड़ी खुर्द, घुघरी, टोपी, कछारगांव, बरौदा, दतला, सिमरिया और बरही क्षेत्र की महानदी में भी अवैध रेत खनन और परिवहन जारी है। बड़वारा के लोहरवारा और जाजागढ़ में भी धड़ल्ले से उत्खनन हो रहा है, जिससे सड़कों की हालत बेहद खराब हो गई है।
? प्रशासनिक लापरवाही बनी चिंता का विषय
खनिज विभाग को अवैध उत्खनन और भंडारण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अधिकारी इन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
? एसडीएम का बयान
प्रदीप मिश्रा, एसडीएम कटनी ने कहा:
“राजस्व एवं खनिज विभाग की टीम को भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
? निष्कर्ष:
कटनी जिले में अवैध रेत खनन से नदियों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है, सड़कों की हालत खराब हो रही है और प्रशासनिक लापरवाही चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।