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बफर ज़ोन में धड़ल्ले से खनन, कानून को ठेंगा दिखा रहा माफिया.

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Illegal mining in Katni’s Pipahi River is causing severe environmental damage, leaving the once-thriving river at risk of extinction.

Destruction of Katni River by illegal sand mining, showcasing environmental damage in the Pipahi River buffer zone.

Illegal sand mining in Katni's Pipahi River threatens its survival, with environmental destruction visible.

Illegal Mining in Buffer Zone, Mafia Thumbs Nose at the Law

Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

MP संवाद, कटनी। जीवनदायिनी कही जाने वाली नदियाँ आज रेत माफिया के लालच और प्रशासन की निष्क्रियता की भेंट चढ़ रही हैं। बरही तहसील की पिपही नदी, जो एक समय गांव की जीवनरेखा मानी जाती थी, अब एक पतली, सूखती नाली में तब्दील हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है बेलगाम रेत खनन और उसे संरक्षण देती चुप्पी साधे सरकारी मशीनरी।

नियमों की धज्जियां और बफर ज़ोन में बेहिचक खनन
जजागढ़ गांव के पास बहती यह नदी बफर जोन में आती है, जहाँ रेत खनन पूर्णतः प्रतिबंधित है। लेकिन जमीन पर चल रही गतिविधियाँ इससे एकदम उलट हैं। नदी किनारे ट्रैक्टरों की आवाजाही, रेत से लदे वाहन और रजिस्टर में होती एंट्रियां इस अवैध व्यापार को वैधता देती नजर आती हैं।

स्थानीयों की आवाज दबा रही है पुलिस?
ग्रामीण गणेश सिंह बताते हैं कि जब वे अवैध खनन का विरोध करते हैं, तो पुलिस ही उन पर दबाव बनाती है। ठेकेदार के गुर्गे धमकियाँ देते हैं और पुलिस उनकी भाषा बोलती है। महज़ 500 मीटर दूर स्थित धनलक्ष्मी कंपनी का यह पूरा नेटवर्क बखूबी संगठित दिखाई देता है।

“10 साल में सूख गई नदी, सूख गईं उम्मीदें”
गाँव के बुजुर्ग सुंदरलाल की आँखें नम हैं। वे बताते हैं, “जहाँ बच्चों को तैरना सिखाते थे, आज वहाँ रेत के टीले हैं। खेतों में पानी नहीं, खेती बंद होने के कगार पर है। नदी तो अब बस यादों में है।”

कागज़ों पर करोड़ों, ज़मीन पर खामोशी
सरकारें जल और वन्यजीव संरक्षण पर हर साल करोड़ों खर्च करने का दावा करती हैं। लेकिन पिपही नदी की दुर्दशा उन दावों की असलियत बयान करती है। वन विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी इस खुली लूट पर मौन सहमति जैसी प्रतीत होती है।

प्रशासन की निष्क्रियता: आने वाली पीढ़ी क्या सिर्फ किताबों में पढ़ेगी ‘पिपही’ नदी का नाम?
अगर अब भी जिम्मेदार नहीं जागे, तो यह नदी जल्द ही इतिहास बन जाएगी।
क्या प्रशासन अब भी नींद से जागेगा? या रेत माफिया ऐसे ही नदियों की सांसें रोकते रहेंगे?

? संबंधित अधिकारी का बयान:”नदी में रेत के अवैध खनन की जानकारी वन विभाग के रेंजर को दी जाएगी। बफर जोन के क्षेत्रों की निगरानी वन विभाग के अधीन होती है।”— महेश मंडलोई, एसडीएम, विजयराघवगढ़

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