संरक्षण की दरकार! ग्यारसपुर में मिली प्राचीन बुद्ध प्रतिमा पर उठी पुरातत्वविदों की माँग.
मध्य प्रदेश के ग्यारसपुर में मिली दुर्लभ बुद्ध प्रतिमा ने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों का ध्यान खींचा। इसके संरक्षण की माँग उठी।
ग्यारसपुर में 5 फीट ऊँची बुद्ध प्रतिमा की खोज, पुरातत्वविदों ने संरक्षण की माँग की
Need for Preservation! Archaeologists Demand Protection for the Ancient Buddha Statue.
Special Correspondent, Sitaram Kushwaha, Vidisha.
भोपाल, 03 मार्च 2025 – मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की ऐतिहासिक नगरी ग्यारसपुर में हाल ही में हुई खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध की 5 फीट ऊँची दुर्लभ प्रतिमा प्राप्त हुई है। यह खोज न केवल बौद्ध धर्म के इतिहास, बल्कि संपूर्ण भारतीय संस्कृति और पुरातत्व के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र अतीत में एक समृद्ध बौद्ध केंद्र रहा होगा, जहाँ बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म के अवशेष सह-अस्तित्व में थे।
बौद्ध धर्मगुरुओं की पहल
इस ऐतिहासिक खोज के मद्देनजर दी बुद्धभूमि धम्मदूत संघ के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ बौद्ध धर्मगुरु भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) भोपाल के सुपरीटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार कुर्मी और विदिशा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने ग्यारसपुर में तत्काल पुरातात्विक उत्खनन और संरक्षण कार्य शुरू करने की माँग की। भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो यह बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर नष्ट हो सकती है।
ग्यारसपुर की ऐतिहासिक महत्ता
ग्यारसपुर सदियों से भारतीय इतिहास, कला और स्थापत्य के एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है। इस क्षेत्र में पहले भी प्राचीन मंदिरों, तोरणद्वारों, स्तूपों और अन्य स्थापत्य संरचनाओं के प्रमाण मिल चुके हैं। अब भगवान बुद्ध की प्रतिमा की खोज से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि यह स्थल बौद्ध धर्म के महत्त्वपूर्ण केंद्रों में से एक रहा होगा।
संरक्षण की माँग और सुझाव
भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को लिखे पत्र में कुछ प्रमुख माँगें और सुझाव दिए हैं—
- तत्काल पुरातात्विक सर्वेक्षण एवं उत्खनन कार्य शुरू किया जाए ताकि इस क्षेत्र में मौजूद अन्य ऐतिहासिक धरोहरों का भी पता लगाया जा सके।
- ग्यारसपुर को संरक्षित राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, जिससे इस स्थल को कानूनी संरक्षण मिल सके।
- यहाँ एक संग्रहालय अथवा सांस्कृतिक धरोहर केंद्र स्थापित किया जाए, जहाँ प्राप्त मूर्तियों, अवशेषों और पुरातात्विक धरोहरों को संरक्षित कर आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जा सके।
- ग्यारसपुर को एक ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, जिससे न केवल इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
इतिहास के पुनर्जीवन का अवसर
ग्यारसपुर की यह खोज भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के लिए एक अमूल्य अवसर प्रदान करती है। यदि समय रहते इस स्थल का व्यवस्थित उत्खनन और संरक्षण किया जाए, तो यह स्थान भारतीय इतिहास के एक नए अध्याय को उजागर कर सकता है।
भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो ने इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि यदि त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अनमोल धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस ऐतिहासिक खोज पर कितनी जल्दी कार्यवाही करता है। यदि सरकार और प्रशासन उचित कदम उठाते हैं, तो ग्यारसपुर भारत के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में से एक बन सकता है।
प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति
इस अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं के प्रतिनिधिमंडल में भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो, भंते रतनबोधि, भंते राहुलपुत्र, भंते श्रद्धातिलक (भिंड) और भंते रेवतधम्मो विशेष रूप से उपस्थित थे।