164 करोड़ की हॉस्पिटल बिल्डिंग, लेकिन हालात ICU जैसे!
₹164 Crore Hospital Building, But Conditions Are Like an ICU!
Special Correspondent, Gwalior, MP Samwad.
A ₹164 crore super specialty hospital in Gwalior has turned into a danger zone. With four ceiling collapses in 20 days, leaking roofs, and broken lifts, patients and staff live in fear. Six years on, the promised ‘super care’ remains a crumbling dream. Accountability is still missing
MP संवाद, ग्वालियर अंचल के सबसे बड़े जेएएच अस्पताल परिसर में स्थित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल अब खुद “खतरे की घंटी” बन चुका है। साल 2018 में 164 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस अस्पताल में अब मरीजों से लेकर स्टाफ तक हर कोई दहशत में है।
20 दिन में 4 जगह गिरी छत, 4 लिफ्ट बंद
बीते 20 दिनों में अस्पताल की चार अलग-अलग जगहों पर फॉल्स सीलिंग गिर चुकी है। बिल्डिंग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कहीं से पानी टपक रहा है, तो कहीं लिफ्टें बंद पड़ी हैं। अस्पताल में लगी 6 में से 4 लिफ्टें खराब हैं। दो चालू लिफ्टों में एक मरीजों और दूसरी स्टाफ के लिए है।
डीन बदले, वादे हुए, लेकिन सुधार नहीं
कोरोना काल के दौरान सितंबर 2019 में ओपीडी शुरू की गई थी। उस समय तत्कालीन डीन डॉ. भरत जैन और फिर डॉ. एसएन आयंगर ने निर्माण एजेंसी एचएससीसी को खामियों को दूर करने के निर्देश दिए थे। लेकिन छह साल बाद भी हालात जस के तस हैं।
स्टाफ एरिया में गिरी छत, बाल-बाल बचे कर्मचारी
हाल ही में रात के समय सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी वार्ड में उस स्थान पर फॉल्स सीलिंग गिर गई जहां स्टाफ बैठता है। सौभाग्यवश उस समय कोई मौजूद नहीं था। इससे पहले भी इसी वार्ड में एक बार फॉल्स सीलिंग गिर चुकी है। अधीक्षक कार्यालय के बाहर भी बारिश का पानी टपकता पाया गया।
पीडब्ल्यूडी की जांच के बाद 14 लाख की मरम्मत योजना
अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की टीम ने प्रभावित वार्डों का निरीक्षण किया है। खराब फॉल्स सीलिंग को हटाकर नई लगाने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए 14 लाख रुपये का आकलन किया गया है।