गरीब की थाली से एथेनॉल की टंकी तक! बालाघाट में फोर्टिफाइड चावल का संगठित लूट.
गरीबों के लिए बना पोषणयुक्त चावल एथेनॉल कंपनियों की कमाई बनता हुआ
From the Poor Man’s Plate to the Ethanol Tank! Organized Loot of Fortified Rice Exposed in Balaghat.
Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद, बालाघाट जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से उपभोक्ताओं को फोर्टिफाइड चावल (FRK) वितरित किया जा रहा है, विशेषकर उन जिलों में जहां कुपोषण की समस्या प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में अधिक है। फोर्टिफाइड चावल में आवश्यक पोषक तत्व, खनिज एवं विटामिन मिलाए जाते हैं, ताकि इसके सेवन से कुपोषण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।
लेकिन इसके विपरीत, भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा गोदाम खाली करने के नाम पर वर्ष 2023-24 में उपार्जित फोर्टिफाइड चावल को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से एथेनॉल उत्पादन करने वाली कंपनियों को बेचा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि एथेनॉल कंपनियां इस चावल से एथेनॉल बनाने के बजाय उसे खुले बाजार में बेचकर भारी मुनाफा कमा रही हैं।
केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल सड़ा-गला, नष्ट एवं अखाद्य चावल ही दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा कानून को दरकिनार कर पोषण से भरपूर खाने योग्य चावल एथेनॉल कंपनियों को बेचा जा रहा है।
गत माह बालाघाट जिले के खापा और बासी ग्राम में स्थित एथेनॉल कंपनियों को लगभग 8 हजार मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल, जिसकी अनुमानित कीमत 18 करोड़ रुपये है, बेचा गया। बताया जा रहा है कि यह चावल 2250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया और बाद में 2450 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक खुले बाजार में बेचा गया।
इस संबंध में भारत सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्रालय के आयुक्त विश्वजीत हलधर ने स्पष्ट किया है कि खाने योग्य फोर्टिफाइड चावल का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में नहीं किया जा सकता और इसके लिए केवल अखाद्य चावल ही उपयोग में लिए जाने चाहिए।
ताजा मामला बालाघाट जिले के लालबर्रा नैतरा स्थित FCI गोदाम से जुड़ा है, जहां से एवीजे एथेनॉल प्लांट बोरगांव (छिंदवाड़ा) के लिए चार ट्रक चावल रवाना हुए थे। इनमें से तीन ट्रकों को खैरलांजी पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर रोका, लेकिन बिना किसी कार्रवाई के उन्हें छोड़ दिया गया।
पुलिस के अनुसार, ट्रक चालकों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। इसके बावजूद एसडीएम के मौके पर पहुंचने के बाद ट्रकों को छोड़ देना कई सवाल खड़े करता है। यह मामला अब मीडिया और जनचर्चा का विषय बन चुका है।
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