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गोपनीय जांच से मचा हड़कंप! चावल घोटाले में FCI की दूसरी दस्तक.

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Shockwaves Over Confidential Probe! FCI Launches Second Inspection in the Rice Scam.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट में सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का मामला अब महज अनियमितता नहीं, बल्कि एक संभावित संगठित नेटवर्क की जांच का विषय बनता जा रहा है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) की चार सदस्यीय टीम ने जिले में पहुंचकर सात राइस मिलों का दोबारा भौतिक सत्यापन किया है। उल्लेखनीय है कि लगभग 12 दिन पहले भी इसी प्रकार का सत्यापन किया गया था। ऐसे में कम अंतराल में हुई दूसरी जांच ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह जांच एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित चावल के उपयोग, कस्टम मिलिंग और स्टॉक सत्यापन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल के उद्देश्य से की जा रही है। हालांकि एफसीआई अधिकारियों ने इसे नियमित प्रक्रिया बताया है।

12 दिन में दूसरी जांच से बढ़े सवाल

जानकारी के अनुसार, एफसीआई भोपाल की टीम ने जिले की सात राइस मिलों का निरीक्षण कर स्टॉक, मिलिंग और रिकॉर्ड का सत्यापन किया। कम समय में दोबारा हुई जांच को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं हैं।

सूत्रों का दावा है कि कलेक्टर स्तर पर हुए पत्राचार के बाद जांच की प्रक्रिया और तेज हुई है।

किन बिंदुओं पर जांच का फोकस?

सूत्रों के मुताबिक जांच में निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—

  • एफसीआई अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका
  • कस्टम मिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड
  • फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति
  • एथेनॉल प्लांट तक भेजे गए चावल का सत्यापन
  • गोदामों से जारी रिकॉर्ड एवं गुणवत्ता जांच प्रक्रिया

हालांकि इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

SIT की जांच भी हुई तेज

इधर, मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने भी कार्रवाई तेज कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को पांच लोगों से पूछताछ की गई, जिनमें राइस मिलर, उनके परिजन, सुपरवाइजर और मुनीम शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने अब तक हिरासत या गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

बताया जा रहा है कि जांच का दायरा मध्य प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों तक भी बढ़ सकता है। हालांकि इसकी भी आधिकारिक पुष्टि शेष है।

इंटर-स्टेट नेटवर्क की भी जांच?

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से जुड़े संभावित कारोबारी संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। कुछ वेयरहाउस संचालकों एवं संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए जाने की भी चर्चा है।

हालांकि संबंधित एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

FCI का पक्ष— ‘रूटीन सत्यापन’

एफसीआई बालाघाट के प्रभारी प्रबंधक हरीश कोरी ने पूरे घटनाक्रम को नियमित प्रक्रिया बताया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में समय-समय पर रेंडम भौतिक सत्यापन किया जाता है और बालाघाट में भी टीम स्टॉक एवं कस्टम मिलिंग की स्थिति का निरीक्षण करने आई थी।

रसूखदारों पर भी जांच की नजर?

सूत्रों के अनुसार, मामले से जुड़े कुछ प्रभावशाली कारोबारी परिवारों में कानूनी गतिविधियां तेज हुई हैं। अग्रिम जमानत के प्रयास और पूछताछ को लेकर चर्चाएं जारी हैं।

हालांकि संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किसी नई कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बड़े सवाल

  • 12 दिन में दूसरी जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी?
  • क्या यह केवल नियमित सत्यापन है या व्यापक जांच का हिस्सा?
  • एथेनॉल के लिए आवंटित चावल की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
  • क्या जांच का दायरा अन्य राज्यों तक बढ़ेगा?

इन सभी सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेंगे।

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This report contains official statements and source-based information. Allegations remain under investigation, and no conclusion should be inferred until officially established.

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