फर्जी डॉक्टर की लापरवाही से नवजात की मौत! उज्जैन में अस्पताल सील, जांच शुरू.
Authorities seal a fake hospital in Ujjain after a newborn’s death due to a quack doctor’s negligence. Investigation underway.
Fake hospital sealed in Ujjain after newborn’s tragic death due to medical negligence.
Fake doctor’s negligence leads to newborn’s death! Hospital sealed in Ujjain, investigation begins.
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
A fake doctor’s negligence in Ujjain led to a newborn’s tragic death. The unauthorized hospital was sealed after protests, but the doctor and middleman fled. The family was misled from a government hospital to an illegal private clinic. Authorities have launched an investigation into the medical scam.
मध्य प्रदेश के उज्जैन में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई। मामला उज्जैन के पांड्याखेड़ी स्थित एक फर्जी अस्पताल का है, जहां गैर-कानूनी रूप से डिलीवरी की जा रही थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है, और स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया। हालांकि, डॉक्टर तैयबा शेख और दलाल माया मौके से फरार हो गए।
निजी अस्पताल में भेजकर लिया 10 हजार, फिर बिगड़ी हालत
श्यामू बाई अपने बेटे संजू मालवीय की पत्नी को डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पताल चरक हॉस्पिटल लेकर गई थीं। वहां से दलालों ने उन्हें माया मालवीय अस्पताल ले जाने का झांसा दिया, जहां उन्हें सामान्य प्रसव का वादा किया गया। लेकिन, मरीज को असल में पांड्याखेड़ी स्थित तैयबा शेख के फर्जी अस्पताल ले जाया गया। झोलाछाप डॉक्टर ने 10,000 रुपये लेकर डिलीवरी करवाई, लेकिन नवजात की हालत बिगड़ने पर उसे दोबारा चरक हॉस्पिटल भेज दिया गया। वहां इलाज के दौरान शिशु की मौत हो गई, और डॉक्टर तैयबा शेख व दलाल मौके से भाग निकले।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल किया सील, लेकिन आरोपी फरार
घटना की सूचना मिलते ही परिजन पंवासा थाने पहुंचे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की। माधव नगर अस्पताल के प्रभारी डॉ. विक्रम रघुवंशी के नेतृत्व में टीम ने फर्जी अस्पताल पर छापा मारा और उसे सील कर दिया।
सरकारी अस्पतालों में सक्रिय दलालों की साजिश
पीड़ित परिवार का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में दलालों का नेटवर्क सक्रिय है, जो गरीब मरीजों को झांसा देकर निजी अस्पतालों में भेज देते हैं। इससे पहले भी कई मामलों में सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी क्लीनिक और फर्जी अस्पतालों में रेफर किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके प्रशासन अभी तक इस पर पूरी तरह लगाम नहीं लगा पाया है।
निष्कर्ष:
यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में दलाली और झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे बल्कि सरकारी अस्पतालों में सक्रिय दलालों पर भी लगाम लगाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।