मिशन हॉस्पिटल, फर्जी डॉक्टर! NHRC ने देशभर की कैथ लैब्स पर उठाए सवाल.
Mission Hospital, Fake Doctor! NHRC Raises Questions on Cath Labs Across the Country.
Source “The Print”, Edited by MP Samwad.
NHRC has directed a nationwide audit of cath labs after a fake cardiologist caused multiple deaths at a mission hospital in Damoh. The investigation revealed severe lapses in qualifications, misuse of Ayushman Bharat funds, and fraud. The Commission seeks strict action from the Health Ministry within four weeks.
MP संवाद, दमोह, मध्यप्रदेश — राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश के दमोह में एक फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ द्वारा की गई प्रक्रियाओं के चलते कम से कम 7 मरीजों की मौत के मामले पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को देशभर की कैथ लैब्स का ऑडिट करने का निर्देश दिया है।
भारत के 140 से अधिक शहरों में लगभग 1,600 कार्डियक कैथ लैब्स हैं, जहां हर साल लगभग 220 नई लैब्स जुड़ती हैं। इन लैब्स में हृदय रोगों के निदान और इलाज के लिए न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रियाएं की जाती हैं।
❗ फर्जी डॉक्टर का खुलासा
अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश पुलिस ने नरेंद्र विक्रमादित्य यादव नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने खुद को लंदन के डॉक्टर एन. जॉन कैम बताकर दमोह के एक मिशन अस्पताल में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाएं कीं, जिससे कई मौतें हुईं। यादव पहले रायपुर के अपोलो अस्पताल सहित कई स्थानों पर फर्जी डॉक्टर बनकर काम कर चुका है।
? डिग्री भी फर्जी, दस्तावेज भी झूठे
NHRC की रिपोर्ट के अनुसार, यादव के पास न तो हृदय रोग विशेषज्ञ बनने की विशेषज्ञता थी और न ही उसकी MBBS डिग्री का कोई प्रमाण मौजूद है। उसने उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज, दार्जिलिंग से डिग्री होने का दावा किया, लेकिन कॉलेज ने इससे इनकार कर दिया।
? अस्पताल की भूमिका भी संदिग्ध
NHRC ने दमोह मिशन अस्पताल को भी दोषी माना है, जिसने यादव की झूठी योग्यता के बल पर जनता और अधिकारियों को गुमराह किया। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों से पैसे भी वसूले, जबकि सरकारी दावों के लिए फर्जी बिल जमा किए।
