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GPS, वायरलेस और डिजिटल सुरक्षा! डायल 112 से बदलेगा MP का पुलिस सिस्टम.

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Dial 112 Bolero Vehicle with GPS for Emergency Police Service in Madhya Pradesh

GPS, Wireless, and Digital Security! MP’s Policing System Set to Transform with Dial 112.

Mohan Nayak/Samarth Yadav, Special Correspondent, Katni/Bhopal, MP Samwad.

From August 15, Madhya Pradesh will replace Dial 100 with the advanced Dial 112 service. Featuring GPS-enabled Bolero vehicles, quicker response time, and real-time location tracking, this system promises better emergency handling. Operated by GVK, Dial 112 marks a new era of smart policing in the state.

कटनी। 15 अगस्त से मध्यप्रदेश में डायल 112 सेवा को पूरी तरह लागू किया जा रहा है। यह नई सेवा अत्याधुनिक बोलेरो वाहनों से लैस होगी, जिनमें GPS, वायरलेस सिस्टम, डिजिटल नेविगेशन और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी उन्नत तकनीकें मौजूद रहेंगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, डायल 100 सेवा को 14 अगस्त से बंद कर दिया जाएगा, और उसकी जगह डायल 112 सेवा पूरे राज्य में शुरू की जाएगी।

कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा ने जानकारी दी कि 14 अगस्त से डायल 100 की पुरानी टाटा सफारी गाड़ियाँ सेवा से हटा ली जाएंगी। उन्होंने बताया कि डायल 100 सेवा की शुरुआत वर्ष 2015 में पांच वर्षों की अवधि के लिए की गई थी, लेकिन तकनीकी बाधाओं, टेंडर प्रक्रिया में देरी, कोविड काल और प्रशासनिक अड़चनों के चलते यह सेवा दस वर्षों तक चलती रही।

अब डायल 112 की जिम्मेदारी बीवीजी कंपनी से हटाकर जीवीके कंपनी को दी गई है, जो पहले से प्रदेश में एम्बुलेंस सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित कर रही है।

डायल 112 की विशेषताएँ:

  • 1200 नई फर्स्ट रिस्पॉन्स गाड़ियाँ पूरे प्रदेश में तैनात की जाएंगी।
  • किसी भी आपातकालीन कॉल पर GPS के माध्यम से शिकायतकर्ता की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
  • इन वाहनों में अत्याधुनिक वायरलेस सिस्टम और लोकेशन ट्रैकिंग के उपकरण होंगे।
  • नई सेवा का रिस्पॉन्स टाइम डायल 100 से कम और ज्यादा सटीक होगा।

पिछले एक वर्ष में डायल 100 के ज़रिए 15,000 से अधिक घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे यह सेवा कई लोगों के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हुई है।

राज्य सरकार द्वारा डायल 112 को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक नया कॉल सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है, जो सेंट्रल सर्वर से जुड़ा होगा। यह पूरे राज्य में एक समान इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध कराएगा। उल्लेखनीय है कि यह मॉडल हरियाणा और राजस्थान में पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है।

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