तालाबों को खोकर प्यासा हुआ धार: गंदे पानी को मजबूर नागरिक.
Visual evidence of Dhar’s water scarcity – dry lakes and desperate citizens highlight failed water management”
Once brimming with water, now parched: The tragic state of Dhar's lakes forcing residents to queue for water tankers
Once Lake-Rich, Now Water-Poor: Dhar Residents Endure Contaminated Supply.
Special Correspondent, Dhar, MP Samwad.
धार का जल संकट! ‘साढ़े बारह तालाबों की नगरी’ को अब 4 दिन में 20 मिनट का गंदा पानी। 1 लाख लोग खरीद रहे पानी, तालाब हो रहे अतिक्रमण का शिकार। नर्मदा योजना अभी भी सपना। क्या प्रशासन जागेगा?
DHAR’S WATER TRAGEDY! Once ‘City of 12 Lakes’ now struggles with 20-minutes of dirty water supply every 4 days. 1 lakh residents forced to buy water as lakes vanish under encroachments. Narmada pipeline remains a pipe dream. Will authorities act before summer worsens the crisis?
MP संवाद, धार: मध्य प्रदेश के ‘तालाबों की नगरी’ धार में इन दिनों पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। शहरवासियों को 3-4 दिन में सिर्फ 20 मिनट के लिए पानी मिल रहा है, वह भी इतना गंदा कि उपयोग लायक नहीं। यह स्थिति तब है जब धार को साढ़े बारह तालाबों वाला शहर कहा जाता था।
संकट की जड़ें:
- अतिक्रमण का शिकार हुए ऐतिहासिक तालाब
- दिलावरा तालाब (मुख्य स्रोत) में सिर्फ 20-30% पानी बचा
- मुंज सागर, देवी सागर जैसे तालाबों पर बस गईं कॉलोनियां
- नगर पालिका का दावा vs जमीनी हकीकत
नागरिकों की पीड़ा:
- वार्ड 18 के पार्षद अजय सिंह ठाकुर:
“पानी इतना गंदा कि पीना तो दूर, नहाने लायक भी नहीं” - लोग निजी स्रोतों से पानी खरीदने को मजबूर
- गर्मी में संकट और गहराया
प्रशासन के बहाने:
- नगर पालिका अधिकारी:
“15 जुलाई तक पानी की व्यवस्था है” - नर्मदा जल योजना का 15 साल से इंतजार
- वादे और धरातल में जमीन-आसमान का अंतर
बड़े सवाल:
- क्या तालाबों को बचाने की कोई योजना है?
- अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कब होगी कार्रवाई?
- नर्मदा का पानी कब तक पहुंचेगा धार?