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शांति, अहिंसा और सेवा का संदेश लेकर लौटी धम्म यात्रा.

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Dhamma Yatra participants welcomed in Bhopal after Bodhgaya journey promoting peace, compassion, and social justice.

Dhamma Yatra 2025 participants honored at Buddhbhumi Mahavihar, Bhopal, after their return from the Bodhgaya Liberation Movement.

The Dhamma Yatra Returns with a Message of Peace, Non-Violence, and Service.

Sitaram Kushwaha, Special Correspondent, Vidisha, MP Samwad.

A grand ceremony was held at Buddhbhumi Mahavihar Monastery, Bhopal, honoring Emperor Ashoka’s legacy and welcoming Dhamma followers returning from the Bodhgaya Liberation Movement. Guided by Bhante Shakyaputra Sagar Thero, the journey promoted peace, compassion, and social justice—reviving Ashoka’s vision of Dhamma as a way of life.

MP, भोपाल, अप्रैल 2025 (रविवार)
महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक की जयंती के उपलक्ष्य में बुद्धभूमि महाविहार मोनेस्ट्री, चुनाभट्टी, कोलार रोड, भोपाल में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भगवान बुद्ध की पावन ज्ञानभूमि बोधगया में चल रहे महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में सहभागिता करने वाले धम्म उपासक-उपासिकाओं का स्वागत और अभिनंदन किया गया।

धम्म यात्रा का शुभ समापन
29 मार्च से 4 अप्रैल 2025 तक बौद्ध समाज के उत्थान और धम्म प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक समर्पित धम्म यात्रा बोधगया के लिए रवाना हुई थी। यह यात्रा 5 अप्रैल को भोपाल में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस यात्रा में भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो एवं श्रद्धेय भिक्षु संघ के मार्गदर्शन में 30 धम्म उपासक-उपासिकाओं ने भाग लिया।

सम्राट अशोक की धम्म नीति — करुणा, अहिंसा और सेवा का संदेश
इस पावन अवसर पर भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो ने कहा कि सम्राट अशोक केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि धम्म के महान प्रचारक थे। उनकी धम्म नीति में सहिष्णुता, अहिंसा, सत्य, दया और सेवा का संदेश निहित था। उन्होंने बौद्ध धम्म को जीवन जीने की एक पद्धति के रूप में अपनाया और उसे व्यापक रूप से प्रचारित किया।

धम्म यात्रियों का भव्य स्वागत
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में सहभागी होकर धर्मचक्र प्रवर्तन करने वाले धम्म उपासक-उपासिकाओं का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं: श्री बी. डी. अहिरवार, श्रीमती शामा अहिरवार, श्रीमती सत्यशीला दुधमल, श्रीमती माया हिवराडे, श्री रामेश्वर गजभिये आदि।

यह आयोजन न केवल स्वागत समारोह था, बल्कि बौद्ध धम्म और सामाजिक न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक भी था। इस सफल यात्रा के माध्यम से महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन को जनसमर्थन मिला और बौद्ध विचारधारा के प्रचार का संकल्प दोहराया गया।

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