कईं सालों से विवादों में BMO डॉ. टी एस मीणा, CMHO और BMO मतलब,अवैध वसूली?
CMHO - BMO means illegal recovery
BMO Dr. T.S. Meena has been in controversies for years — Does CMHO and BMO mean illegal extortion?
Kamlesh, Editor Desk, Bhopal, MP Samwad.
Since 2016, BMO Dr. T.S. Meena has been surrounded by a series of controversies, yet continues in position while the administration watches silently. From corruption complaints to public outrage, the list grows longer. Is silence approval? It’s time for answers and accountability in the healthcare system.
MP संवाद भोपाल, विदिशा । ग्यारसपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. टी.एस. मीणा एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर सरकारी संसाधनों का दुरुप्रयोग, भ्रष्टाचार, अवैध क्लीनिकों को संरक्षण और सहकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन सभी आरोपों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। यदि CMHO डॉ योगेश तिवारी से इसकी कोई जानकारी लेने फोन करें तो पत्रकारों को ब्लॉक कर देते है यदि डॉक्टर मीणा को फोन करो तो वे फोन ही नहीं उठाते. सीएमएचओ डॉ. योगेश तिवारी और डॉ. मीणा के बीच मजबूत सामंजस्य बताया जा रहा है, जो शायद इन मामलों पर पर्दा डालने का कारण हो सकता है। ग्यारसपुर और हैदरगढ़ में कईं झोलाछाप डॉक्टर क्लिनिक BMO कि संरक्षण में चला रहे है. सभी से अवैध वसूली का खेल BMO डॉ टी एस मीणा कर रहे है.
महिला सहकर्मी को नशे की हालत में गाली देने का वायरल ऑडियो
हाल ही में एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें डॉ. मीणा को एक महिला सहकर्मी को नशे की हालत में गाली-गलौज करते हुए सुना जा सकता है। इस मामले ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इसकी जांच तक नहीं की।
बिना योग्यता के CHC की OPD में मरीजों का इलाज किया
MP संवाद के पास एक वीडियो है, जिसमें डॉ. मीणा के बेटे को ग्यारसपुर CHC की OPD में बैठकर मरीजों का इलाज करते हुए दिखाया गया है। जब MP संवाद कि टीम ने CMHO डॉ योगेश तिवारी से बात करनी चाही तो उन्होंने पहले से ही हमें ब्लॉक कर रखा था. इससे यह सवाल खड़ा करता है कि डॉ. टी एस मीणा को CMHO डॉ योगेश तिवारी पूर्ण रूप से संरक्षण प्राप्त है। अब सवाल उठता है कि क्या बिना एलोपैथिक मेडिकल योग्यता के किसी को मरीजों का इलाज करने की अनुमति दी जा सकती है?

अवैध क्लीनिकों को संरक्षण देने के आरोप
डॉ. मीणा पर अवैध क्लीनिकों को बंद करने के बजाय उन्हें संरक्षण देने के आरोप भी लगे हैं। अक्टूबर में डॉ. भूपेंद्र दुबे और डॉ. माकन लोधी के क्लीनिक सील किए गए थे, डॉ. दुबे ने डॉ. मीणा पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। बाद में लेन देन से यह दोनों क्लीनिक धड़ल्ले से संचालित हो रहे है. बिना किसी वैधानिक कार्यवाही के क्लीनिक दोबारा चालू हो गए.
महिलाओं की नसबंदी में लापरवाही और झोला छाप डॉक्टर से मरीज की मौत
जनवरी में ग्यारसपुर CHC में महिलाओं की नसबंदी के दौरान उन्हें कड़ाके की ठंड में फर्श पर लिटाया गया, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हुईं। इसके अलावा, 23 जनवरी को एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा दिए गए इंजेक्शन से एक मरीज की मौत हो गई, लेकिन अभी तक इस पर क्या कार्रवाई हुई जानकारी देने से बचते हैं बीएमओ।

2016 से जारी हैं विवाद
डॉ. मीणा का यह पहला विवाद नहीं है। 2016 में भी उन पर भ्रष्टाचार, अभद्रता और स्टाफ के साथ मारपीट के आरोप लगे थे। तत्कालीन CMHO ने उन्हें हटाकर डॉ. ममता परतें को BMO बनाया था, लेकिन कुछ सालों बाद वे फिर से इस पद पर आ गए।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. मीणा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर ऊंचे स्तर पर संरक्षण? यह सवाल अब जनता के मन में उठ रहे हैं।