इजाज़त कुछ और, इमारत कुछ और — शहरी प्रशासन की सबसे बड़ी पोल खुली.
Permission was for something else, the building is something else — the biggest exposure of urban administration.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल, Madhya Pradesh Legislative Assembly में पेश
Comptroller and Auditor General of India (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन और भवन निर्माण निगरानी व्यवस्था की गंभीर पोल खोल दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में केवल तीन वर्षों में 33,018 भवन निर्माण अनुमतियाँ जारी की गईं, लेकिन इनमें से सिर्फ दो निर्माणों को ही Completion Certificate मिला।
यानी,
हज़ारों इमारतें बनीं,
लेकिन नियमों के अनुसार पूरी हुईं या नहीं — इसकी कोई परवाह ही नहीं की गई।
सबसे चौंकाने वाले खुलासे Gwalior से जुड़े हैं, जहाँ कई बड़े और प्रभावशाली प्रोजेक्ट स्वीकृत नक्शों और शर्तों से हटकर बनाए गए।
TNCP और नगर निगम की मिलीभगत से फेल हुआ सिस्टम
CAG की रिपोर्ट में Town and Country Planning Department, Madhya Pradesh (TNCP)
और Gwalior Municipal Corporation की लापरवाही को प्रमुख कारण माना गया है।
रिपोर्ट के अनुसार—
- केसर मॉल के स्वीकृत नक्शे में ओपन पार्क का प्रावधान था,
लेकिन वहां पोडियम पार्क बना दिया गया — जो स्वीकृत लेआउट का सीधा उल्लंघन है। - पूर्व गृहमंत्री Narottam Mishra के परिजनों से जुड़े इंपीरियल गोल्फ रिसोर्ट में भी गंभीर अनियमितताएँ दर्ज की गई हैं।
C-ब्लॉक में ‘झूमर’ के नाम पर पूरा कमरा!
CAG की जांच में सामने आया कि—
- C-ब्लॉक में झूमर लगाने के नाम पर
अतिरिक्त छत और बार-डिज़ाइन से अलग एक नया कमरा बना दिया गया। - सड़क चौड़ीकरण के लिए छोड़ी जाने वाली भूमि पर निर्माण किया गया।
- पार्किंग और खुली भूमि से जुड़े नियमों का खुला उल्लंघन हुआ।
स्वीकृति कुछ, इस्तेमाल कुछ और
CAG रिपोर्ट में ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे प्रोजेक्ट सामने आए हैं, जहाँ—
- एम्पायर रिसोर्ट, तुरारी – होटल की अनुमति, लेकिन मैरिज गार्डन संचालित
- 7 हिल्स रिसोर्ट – रिसोर्ट की अनुमति, लेकिन मैरिज गार्डन
- चोपड़ा चेस्ट, KMJ, अंश और सरल मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल – आवासीय स्वीकृति, लेकिन अस्पताल संचालित
- ऑर्किड टॉवर – अतिथि गृह की अनुमति, लेकिन 13 मंज़िला आवासीय-व्यावसायिक टावर
- शिवहरे रिसोर्ट – MOS के तहत खाली स्थान अनिवार्य था, लेकिन वहीं पोर्च, रिसेप्शन और रेस्टोरेंट बना दिए गए
रिपोर्ट आई तो हरकत में प्रशासन
रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर निगम और TNCP दोनों विभागों में हड़कंप मचा हुआ है।
ग्वालियर की जिला कलेक्टर Ruchika Chauhan और नगर निगम आयुक्त ने कहा है कि—
“जिन निर्माणों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
CAG रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष
CAG ने साफ शब्दों में माना है कि—
- भौतिक सत्यापन समय पर नहीं हुआ
- स्वीकृति देने के बाद निगरानी लगभग शून्य रही
- नियमों से हटकर बने निर्माणों को वर्षों तक संरक्षण मिला
बड़ा सवाल
जब एक ही शहर में—
- स्वीकृति कुछ और,
- निर्माण कुछ और,
- और संचालन कुछ और…
तो यह केवल लापरवाही नहीं,
नगरीय प्रशासन तंत्र की सुनियोजित विफलता है।
ग्वालियर से शुरू हुआ यह खुलासा आने वाले दिनों में
मध्य प्रदेश की शहरी विकास नीति और अधिकारियों की जवाबदेही पर
एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट खड़ा कर सकता है।
CAG की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है —
मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में इमारतें नहीं,
नियमों की कब्रें खड़ी की जा रही हैं।