बिरसा मुंडा मेडिकल कालेज की हकीकत: पांच साल में भी CT स्कैन और ब्लड बैंक नहीं चालू.
Birsa Munda Medical College continues to face delays in healthcare services despite years of approval, leaving key departments inactive.
Despite approvals, critical healthcare services like CT scan, blood bank, and departments remain inactive at Birsa Munda Medical College.
The Reality of Birsa Munda Medical College: Even After Five Years, CT Scan and Blood Bank Are Not Operational.
Special Correspondent, Shahdol, MP Samwad.
Despite five years of approval, crucial departments like Cardiology, Nephrology, and essential services like CT scan and blood bank remain non-operational at Birsa Munda Medical College, highlighting the gap in healthcare services.
MP संवाद, शहडोल (Shahdol)। प्रदेश सरकार ने आदिवासी क्षेत्र शहडोल संभाग में बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज तो खोल दिया, लेकिन यह संस्थान अब भी डॉक्टरों और आधारभूत चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है।
शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और डिंडोरी सहित आसपास के आदिवासी और गरीब मरीज इस अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें आवश्यक उपचार नहीं मिल पाता। गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि यहां स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी कमी है।
अब भी खाली हैं दर्जनों पद
पांच साल बीतने के बावजूद 120 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 78 पद ही भरे जा सके हैं। कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसे महत्वपूर्ण विभाग आज तक शुरू नहीं हो पाए हैं। CT स्कैन, सोनोग्राफी और ब्लड बैंक जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अब तक चालू नहीं हुई हैं। रेडियोलॉजिस्ट का पद भी हाल ही में भरा गया है, जो पांच साल से खाली पड़ा था।
PG की पढ़ाई नहीं, सेवाएं अधूरी
यहां अभी केवल MBBS की पढ़ाई होती है। PG कोर्स शुरू नहीं होने से रेजिडेंट डॉक्टर नहीं हैं, जिससे मरीजों की देखभाल और इलाज में भारी दिक्कत आती है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन, सर्जरी, डेंटल, पीडियाट्रिक और गायनी विभागों में भी विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है।
कॉलेज डीन डॉ. गिरीश बी. रामटेक का कहना है कि डॉक्टरों की भर्ती अब काफी हद तक पूरी कर ली गई है और जल्द ही बाकी सुविधाएं भी चालू होंगी।